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Tuesday, 28 February 2017

DEAR KIDS,

SORRY RUSHING OUT OF TOWN FOR A FEW DAYS, DON'T KNOW, WHEN I'M BACK. WILL UPLOAD MAXIMUM, PLEASE BEAR WITH ME. BEST OF LUCK TO YOU ALL. MAY GOD BLESS YOU ALL. :) <3

SEETHA LAKSHMI.

Lesson 7

पतझर में टूटी पत्तियाँ

शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है ?

शुद्ध सोने में कोई मिलावट नहीं होती जबकि गिन्नी के सोने में ताँबे की जाती है।  इस मिलावट के कारण गिन्नी का सोना शुद्ध सोने की तुलना में अधिक चमक और मज़बूत होता है।

प्राक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं ?

प्रैक्टिकल आयडियालिस्ट वो है जिसके खाने के और दिखाने के दाँत अलग - अलग हैं, मतलब वह ऊँची - ऊँची आदर्शवादी विचार व्यक्त करते हैं किन्तु अपने जीवन में व्यवाहारिकता (practicality ) को अधिक महत्त्व देते हैं ।  अपने स्वार्थ को आगे रखकर सोचना उनका व्यक्तित्व है।

पाठ के सन्दर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है ?
 
जैसे शुद्ध सोने में कोई मिलावट नहीं होती उसी प्रकार एक सच्चे आदर्शवादी के आदर्शों में व्यवाहारिकता की मिलावट नहीं होती, उनके कहनी और करनी में कोई फर्क नहीं होता।  वे समाज की भलाई चाहते हैं। 

लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड' इंजन लगने की बात क्यों कही है ?

जापानी लोग बहुत ही महत्वाकांक्षी होते हैं, उन्हें सदैव प्रतिस्पर्धा सताती है , इसलिए यह कहा जा सकता है उनके दिमाग में "स्पीड' लगा हुआ है।  वे अमरीकियों से आगे बढ़ने की होड़ में हमेशा तनावग्रस्त रहते हैं।  वे अपनी क्षमता से अधिक, काम समय प्रगति करना चाहते हैं।

जापानी में चाय पिने की विधि को क्या कहते हैं ?

जापानी में कहा पीने की विधि को 'चा -नो - यू ' कहते हैं , जिसका अर्थ है ' टी - सरेमोनी ' . चाय पिलाने वाले को 'चाजीन ' कहते हैं।

जापान में जहां चाय पिलाई जाती है , उस स्थान की क्या विशेषता है ?

जापान में "टी - सरेमोनी " एक बहुत ही महत्वपूर्ण विधि है।  चाय पिलाने वाली जगह की सजावट बहुत ही सुन्दर होती है , वातावरण शांतिपूर्ण होता है , उस स्थान पर केवल तीन लोग ही चाय पी सकते हैं। 


Lesson - 6

अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुखी होनेवाले

बड़े - बड़े बिल्डर समुद्र को क्यों पीछे धकेल रहे थे  ?

बड़े - बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे धकेल रहे थे ताकि उस जगह पर भी बड़ी - बड़ी इमारतें बना सकें।

लेखक का घर किस शहर में था ?

लेखक का घर ग्वालियर में था, किन्तु नौकरी उन्हें मुम्बई ले आई थी।

जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है ?

सयुंक्त परिवार का चलन रहते लोग बड़े - बड़े घरों में अपने सभी रिश्तेदारों के साथ एक ही चाट के नीचे रहते थे , किन्तु परिवारों के सिकुड़ने के साथ - साथ लोगों के दिलों में भी जगह काम हुई और सब डिब्बे जैसे घरों में रहने लगे हैं।

कबूतर परेशानी में इधर - उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे ?

कबूतर ने अपने घोंसले में दो अंडे दिए थे , एक को तो बिल्ली खा गई और दुसरा लेखक की माँ के हाथों टूट गया , इसलिए कबूतर परेशान थे।

लिखित

अरब में लश्कर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं ?

"नूह" का मतलब मसीहा है , वे एक दरियादिल इंसान थे।  एक बार एक कुत्ते ने उन्हें दुत्कारा इस कारण वे अपनी गलती को सोच - सोच रोते रहे, इसलिए उन्हें नूह का नाम मिला।

लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों ?

लेखक की माँ सूर्यास्त के बाद पत्ते तोड़ने को मना करती थीं , उनका मानना था कि इससे पेड़ों को दर्द होता है, जिससे वे रोएँगे और बद्दुआ देंगे।

प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ ?

प्रकृति में असुंतलन के कारण मौसम - चक्र में बहुत परिवर्तन हुआ।  गर्मी का प्रचंड प्रकोप , समय - असमय वर्षा होना , तूफ़ान , बाढ़, भूकंप और नए - नए रोगों की उत्पत्ति।

लेखक की माँ ने पूरे दिन का रोज़ा क्यों रखा ?

लेखक की माँ कबूतर के अंडे बचाना चाहती थी, पर जब वह उसे एक सुरक्षित स्थान पर रखने की प्रयास में थीं, वह उनके हाथ से वह छूट कर टूट गया।  इसी पाप का प्रायश्चित करने के लिए उन्होंने पूरे दिन रखा। 

लेखक ने ग्वालियर से मुम्बई तक किन बदलावों को महसूस किया ?

लेखक ने लुप्त होती हुई हरियाली देखी , अब हर जगह इमारतें ही इमारतें थीं, जहाँ पहले जंगल थे, उन्हें अब काटकर सड़कें बना दी गईं , मनुष्य केवल अपना स्वार्थ देखता है , प्रकृति का कोई मोल नहीं।

'डेरा डालने' से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए।

'डेरा डालने' का मतलब है किसी और के घर को अपना समझ वहाँ बस जाना।  पेड़ों के काटने की वजह से पशु - पक्षियों से उनका बसेरा छिन गया और वे मनुष्यों के घरों में घोंसले बनाकर, 'डेरा डालने' लगे।

शेख अयाज़ के पिता ने अपने बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़कर क्यों उठ खड़े हुए ?

पुराने ज़माने के घरों में कुआँ हुआ करता था, जहाँ लोग अपने हाथ - पैर धोने के बाद ही भोजन करते थे. जब शेख अयाज़ के पिता ने अपने बाजू पर एक काले च्योंटे को देखा तो वे तुरंत उसे उसके घर, यानि कि कुँए तक छोड़ने गए।

आशय स्पष्ट

नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है।  नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बम्बई में देखने को मिला था।

प्रकृति माँ - समान सभी प्राणियों का पोषण करती है , वह बदले में कुछ नहीं चाहती, किन्तु मनुष्य ने जब से अपने स्वार्थपूर्ति के लिए पेड़ काटना, जंगल साफ़ करना शुरू किया वह थोड़ा खीझ सी गई है , कुछ साल पहले बम्बई में आए तूफ़ान इसका एक उदाहरण है।  समुद्रतट पर बनाए गए इमारतों की वजह से लहरों ने तीन जहाज़ों को बम्बई के तीन अलग - अलग जगहों पर पटक दिया।  लोग इस तरह घायल हुए कि घाव भरने में काफी वक़्त लगा।

जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही काम गुस्सा आता है।


विशाल - हृदय वाला व्यक्ति सदैव सभी की मंगलकामना करता है , शीघ्र क्षमा करता है, बहुत सहता है पर क्रोध काम करता है किन्तु जब उसकी इसी सहनशीलता का लोग गलत प्रयोग करते हैं तो उसके क्रोध की सीमा नहीं रहती।  यहाँ समुद्र के लिए ऐसा उदाहरण दिया गया है , जो कुछ समय तक अपने तट पर बनते इमारत को देखता रहा , पर तूफ़ान आने पर उसने अपना असली प्रभाव दिखा ही दिया।

इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है।  इनमे से कुछ शहर छोड़कर चले जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ - वहाँ डेरा दाल लिया है।


इसका आशय यह है कि प्रकृति में सब के लिए स्थान है , हार कोई शान्तिपूर्वक एकता से रह सकता है किन्तु मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जो अधिकाधिक धन जुटाने की होड़ में दूसरों के स्थान पर क़ब्ज़ा करता है , जैसे पेड़ और पक्षियों और पशुओं का निवास स्थान है उसे काट कर वहाँ अपने लिए घर और व्यापार की सीमा बढ़ाना इत्यादि।  इस कारण इन प्राणियों ने या तो अपना घर बदल दिया मनुष्य इ बनाए इस घर या इमारत पर डेरा दाल दिया।

शेख अयाज़ के पिता बोले, "नहीं, यह बात नहीं है।  मैंने एक घरवाले को बेघर कर।  उस बेघर को कुऍं पर उसके जा रहा हूँ।  इन छिपी हुई उनकी भावना को स्पष्ट कीजिए

शेख अयाज़ के पिता बहुत दयालु थे, एक बार भोजन करते समय उन्हें अपने बाजू पर एक काला च्योंटा रेंगता दिखाई दिया , वे तुरंत उठ खड़े हुए, पूछने पर यह कहा कि यह च्योंटा ज़रूर कुँए के पास -हाथ  मुँह धोते वक़्त उनके साथ चला आया होगा, उसे उसके घर वापस छोड़ना ज़रूरी है।  एक घरवाले को बेघर करना बहुत बड़ा पाप है।

समाप्त।  :)


Saturday, 18 February 2017

दोहे


सोहत ओढैं पितु पटु स्याम, सलौने गात।
मनो नीलमनि - सैल पर आतपु परयौ प्रभात।

भावार्थ :  इस दोहे में बिहारी (दोहाकार) दो सखियों के बीच भगवान् श्री कृष्ण को लेकर हुए बातचीत को प्रस्तुत कर रहें हैं।  एक सखी अपने दूसरी सखी से श्याम (स्याम) की अलौकिक सुंदरता का वर्णन करते हुए कहती है कि  श्याम जो नीले (साँवले ) रंग के हैं, उन पर यह पीला वस्त्र उनकी सुंदरता को चार चाँद लगाए हुए है जैसे सुबह की पहली पिली किरणें नीलमणि पर्वत को सुशोभित कर रहीं हैं।

कहलाने एकत बसत अहि मयूर, मृग बाघ।
जगतु तपोबन सौ कियौ दीरघ - दाघ निदाघ ।।

गर्मी एक ऐसी ऋतु है जब सारे जीव छाया एवं ठंडक तो तरस जाते हैं।  जंगल के कुछ नियम हैं , शिकारी और शिकार एक साथ कभी नहीं दिखाई पड़ता, किन्तु भीषण गर्मी में जब सब छाँव को तरस जाते हैं , तब एकसाथ दिखाई पड़ता हैं।  सब का प्राण मानो सूख सा गया है , किसी को भी नियम का ध्यान नहीं।

बतरस - लालच लाल की मुरली धरी लुकाई
सौंह करैं भौंहनु हंसै , देन कहैं नटि जाइ ।

कृष्ण सदैव अपनी मुरली (बाँसुरी ) से चिपके रहते हैं।  इससे खीझ कर गोपियाँ उनकी बाँसुरी छुपा देतीं हैं , जब कृष्ण उनसे पूछते हैं तो वह सौगंध खाती है कि इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता, किन्तु उनके मुस्कुराते चेहरों से यह साफ़ झलकता है कि यह काम उन्हीं का है।  जब कृष्ण उनसे बाँसुरी की मांग करते हैं तो वे साफ़ मना कर देती हैं।  वे केवल इतना चाहती हैं कि  कृष्ण उन्हें भी थोड़ा समय दें, उनसे भी बात करें । 

कहत , नटत , रीझत , खिझत , मिलत , खिलत , लजियात।
भरै भौन में करत हैं , नैननु ही, सब बात ।।

बिहारी यहाँ प्रणय रास का वर्णन कर रहें हैं।  दो प्रेमियों को मुँह से बात करने की आवश्यकता नहीं, आँखों की भाषा ही काफी है।  भरे भवन, लोगों की भीड़ में , प्रेमी , प्रेमिका को आँखों से इशारे करते हुए अपने समीप बुलाता है।  प्रेमिका तुरन्त मना कर देती है, उसके इस ढंग से प्रेमी खुश हो जाता है, यह देखकर वह खीझ (गुस्सा) जाती है।  फिर दोनों आँखों से बात करते हुए इस कलह को भूल जाते हैं , इस तरह भरी भीड़ में भी दोनों एक दूसरे से बात करने में सक्षम हैं।

बैठि रही अति सघन बन , पैठि सदन - तन माँह।
देखि दुपहरी जेठ की छाहौं चाहति छाँह ।

जेठ का महीना काफी कष्टदायक होता है, ऐसे में लोग घर से बाहर जाने को मना कर देते हैं , अच्छाई इसी में है कि सब घर में अधिक समय बिताएँ।  सूरज सीधा सर के ऊपर होता है और किसी भी वस्तु की छाया धरती पर नहीं पड़ती। सब को शीतलता देने वाली वृक्ष, घरों आदि की छाया भी गायब हैं , ऐसा लगता है कि मानो छाया भी छाया को तरस गई हो। 

कागद पर लिखत न बनत , कहत सँदेसु लजात।
कहिहै सब तेरौ हियौ , मेरे हिय की बात ।


यहां पर प्रेमिका के ह्रदय - भाव जो अपने नायक से बिछुड़ने पर तड़प रही है, उसका वर्णन है।  वह कहती है कि  तुमसे बिछड़ने पर मुझे कुछ भी नहीं भा रहा. पर मैं अपने भावों को लज्जावश कागज़ में शब्द - रूप नहीं दे पा रही , अगर लिखना भी चाहूँ तो काँपते हुए, पसीने से भरे हाथ और आँसुओं से भरी आँखें मुझे लिखने नहीं दे रहीं।  तुम्हारी भी तो यही दशा है, तुम मेरे विरह (pangs of separation) को क्यों नहीं समझ पा रहे ?

प्रगट भए द्विजराज - कुल, सुबस बजे ब्रज आइ।
मेरे हरौ कलेस सब, केसव केसवराइ ।

कवि इस दोहे में भगवान् श्री कृष्ण को अपना पिता - समान , सम्मान देते हुए यह कह रहे हैं कि , तुम अपनी इच्छा से चंद्रकुल में उत्पन्न हुए, तुमहारे कोई बात मुश्किल नहीं।  हे ब्रजवासी!   तुम मेरे पिता-समान हो, मेरे संरक्षक हो, मेरी पीड़ा भी हरो, (दूर करो) .

जपमाला , छापैं , तिलक सरै न एकौ कामु
मन-काँचै नाचै बृथा , साँचै राँचै रामु ।

हाथ में जपमाला लेकर उपरवाले का नाम जपना, गेरुए वस्त्र धरना, शरीर पर चन्दन मलना, तिलक आदि धारण करना, यह सब बाहरी वेश, हैं, ये सब दिखावा है , अगर मन में ईश्वर का निवास न हो।  इसे भक्ति नहीं कही जा सकती अगर हम व्यर्थ दिखावे में अपना समय नष्ट करें. भगवान केवल सच्ची भक्ति को ही मानते हैं, जैसे राम ने शबरी के जूठे फल में छिपी अनन्य भक्ति को ही देखी।

समाप्त

सीता लक्ष्मी :)

Thursday, 16 February 2017

Lesson - 5

गिरगिट


मौखिक

काठगोदाम के पास भीड़ क्यों इकट्ठी हो गई थी ?

काठगोदाम के पास एक कुत्ते ने किसे आदमी की ऊँगली काट खाई थी।  आदमी बहुत दर्द में था, वह चीखता - चिल्लाता कुत्ते के पीछे भाग रहा था. कुत्ते की पिछली टाँग पकड़ कर उसे मार रहा था।  कुत्ता दर के मारे किकिया रहा था।  इस तमाशे को देखने के लिए काठगोदाम के पास भीड़ इकट्ठी हो गई थी।

ऊँगली ठीक न होने की स्तिथि में ख्यूक्रिन का नकसान क्यों होता ?

ख्यूक्रिन एक कामकजी व्यक्ति था। उसका काम पेचीदा तरीके का था।  वह लकड़ी का काम निपटाने जा रहा था , जब अकारण ही कुत्ते ने उसकी ऊँगली काट ली।  अब उसे एक हफ्ते तक खाली रहना पड़ता, जिससे उसका काफी नुकसान होता। 

कुत्ता क्यों किकिया रहा था ?

ऊँगली कट जाने की वजह से ख़्यूक्रिन काफी गुस्से में था, उसने कुत्ते को एक टाँग से पकड़ कर खींचा, जिससे कुत्ता रेंग - रेंग कर चल रहा था, और वह अपने ऊपर आने वाली विपत्ति के बारे में सोच कर किकिया रहा था।

बाज़ार के चौराहे पर खामोशी क्यों थी ?

इंस्पेक्टर ओचमेलाव बाज़ार के गश्त (rounds ) लगा रहा था।  वह बहुत भ्रष्ट आदमी था , अपने अधिकार के डैम पर आम आदमी को अपने दबाव में रखता था , उसके आने की वजह से सभी दुकानदार और जनता के लोग खामोश थे। 

जनरल साहब के बावर्ची ने कुत्ते के बारे में क्या बताया ?

जनरल साहब के बावर्ची ने यह सुचना दी कि कुत्ता जनरल साहब का नही बल्कि उनके भाई झिजलाव का है। कुत्ता बोरजायस नस्ल का है जिसमे जनरल साहब को कोई दिलचस्पी नहीं। 

लिखित

ख़्यूक्रिन ने मुआवज़ा पाने की क्या दलील दी ?

ख़्यूक्रिन ने मुआवज़ा पाने की यह दलील दी कि वह एक ग़रीब , कामकाज़ी व्यक्ति है और कुत्ते के द्वारा काटे जाने के कारण उसे एक हफ्ते तक खाली रहना पडेगा जो उसके लिए काफी नुकसानदायक है.

ख़्यूक्रिन ने ओचमेलाव को ऊँगली ऊपर उठाने का क्या कारण बताया ?

ख़्यूक्रिन यह जताना चाहता था कि वह बेचारा अपने काम से बाजार जा रहा था, जब कुत्ते ने अकारण ही उसकी ऊँगली काट ली।  वह लोगों की हमदर्दी बटोरना चाहता था।

येलदरीनने ख़्यूक्रिन को दोषी ठहराते हुए क्या कहा ?

येलदरीन को जब यह पता चला कि कुत्ता जनरल साहब के भाई का है तो वह एकदम बदल गया और क्योंकरिन को दोषी ठहराते हुए यह कहा कि कुत्ता एक नाज़ुक प्राणी है, अवश्य ही ख़्यूक्रिन ने कुत्ते की नाक में सुलगती हुई सिगरेट घुसाई होगी जिस कारण कुत्ते ने उसे काट खाया होगा।  सारा दोष ख्यूक्रिन का है, कुत्ते का नहीं।

ओचुमेलॉव ने जनरल साहब के पास यह सन्देश क्यों भिजवाया होगा कि 'उनसे कहना कि यह मुझे मिला और मैंने इसे वापस उनके पास भेजा है '?

ओचुमेलॉव एक चापलूस था, वह हर स्थिति का फायदा उठाना अच्छी तरह से जानता था।  उसने सोचा कि इस मौके का फायदा उठा कर मैं जनरल साहब का हितैषी बनकर यह कुत्ता सौंपूँगा तो उनकी नज़र मुझ पर पड़ेगी और भविष्य में मुझे लाभ होगा।  यह सोच उसने जनरल साहब को उपरोक्त सन्देश भिजवाया।

भीड़ ख्यक्रिन पर क्यों हँसने लगती है ?

पहले तो ओचुमेलॉव ख़्यूक्रिन का पक्ष लेकर कुत्ते के मालिक से उसे मुआवज़ा दिलाने की कोशिश करता है पर जब उसे यह पता लगता है कि कुत्ता जनरल साहब के भाई का है तो वह गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए कुत्ते का पक्ष लेता है।  कुछ गलतफहमियों की वजह से यह किस्सा बार - बार चलता है और अंत में वह कुत्ते का ही पक्ष लेता है।  उसे बदलते फ़ितरत और ख्यूक्रिन की दयनीय स्थिति को देखकर भीड़ उस पर हँसने लगती है। 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न

किसी कील - विल से ऊँगली छील ली होगी - ऐसा ओचुमेलॉव ने क्यों कहा ?

ओचुमेलॉव एक गिरगिट किस्म इंसान था , यानि कि वह समयानुसार अपनी फ़ितरत बदलता था।  जहाँ उसने अपना फायदा देखा, वहीँ का वह हो जाता था।  पहले तो उसने ख़्यूक्रिन को मुआवज़ा देने की बात कही, पर जैसे ही उसे पता चला कि कुत्ता जनरल साहब के भाई झिगमेलाव का है, तो उसने तुरंत ख़्यूक्रिन को दोषी ठहराते हुए यह कहा कि कुत्ता एक नाज़ुक प्राणी है, ज़रूर ख़्यूक्रिन की हरकत की वजह से कुत्ते ने उसे काटा होगा।  उसने तो यह भी कह डाला कि ख़्यूक्रिन झूठ बोल रहा है , उसकी ऊँगली किसी छील - विल से कट गई होगी।

ओचुमेलाव के चरित्र की विशेषताओं को अपने शब्दों में लिखिए।

क ओचुमेलॉव एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी था।

ख  अपने से बड़े अधिकारियों को खुश करने की ताक में रहता था, ताकि उसे पदोन्नति मिले।

ग़ आम साधारण जनता जमाकर तंग करता था।

घ अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक जा सकता था।

यह जानने के बाद कि कुत्ता जनरल साहब के भाई का है - ओचुमेलॉव  के विचारों में क्या परिवर्तन आया और क्यों ?

ओचुमेलाव एकदम से बदल गया , उसने अपनी ही बात उलट डाली।  पहले तो उसने कुत्ते को आवारा , भद्दा और मरियल कहा और मुआवज़े की बात की।  बाद में उसने कुत्ते को नाज़ुक और सुन्दर पिल्ला कहा।  उसने ख़्यूक्रिन को दोषी ठहराया और धमकी देकर भगा दिया। वह अपने से बड़े अधिकारियों को नाराज़ नहीं करना चाहता था।  वह उन्हें खुश कर के पदोन्नति चाहता था।

ख़्यूक्रिन का यह कथन कि , 'मेरा एक भाई भी पुलिस में है' . समाज की किस वास्तविकता की और संकेत करता है ?

ख़्यूक्रिन का यह कथन इस बात को दर्शाता है कि  उस वक़्त समाज में भ्रष्टाचार फैला हुआ था , लोग अपने ही रिश्तेदारों को नौकरी पर लगाते थे , किसी के योग्यता पर नहीं।  इससे यह भी पता चलता है कि  उस वक्त पुलिस लोगों को भयभीत करके रखती थी।


इस कहानी का शीर्षक 'गिरगिट' क्यों रखा होगा ? क्या आप इस कहानी के लिए कोई अन्य शीर्षक सुझा सकते हैं ? अपने शीर्षक का आधार भी स्पष्ट कीजिए।


गिरगिट एक ऐसा प्राणी है जो वातावरण के अनुरूप अपना रंग बदलता है।  वह ऐसा अपने शिकारियों से बचने के लिए करता है।  किसी मनुष्य को हम गिरगिट तब बुलाते हैं जब वह अपने ज़बान से यानि कि किए हुए वादे से पीछे हट जाए।  मनुष्य अपना अहम् बनाए रखने, अपने स्वार्थ के लिए और अपना काम निकलवाने के लिए गिरगिट बनता है।  इस कहानी शीर्षक ओचुमेलॉव के पात्र पर ही आधारित है।  इस कहानी का एक और शीर्षक 'चापलूस' भी हो सकता है।

'गिरगिट' कहानी के माध्यम से समाज की किन विसंगतियों पर व्यंग्य किया गया है ? क्या आप ऐसी विसंगतियाँ अपने समाज में भी देख सकते हैं ? स्पष्ट कीजिए।

लेखक गिरगिट कहानी के माध्यम से समाज में फैली भ्रष्टाचार नामक कुरीति के बारे में बताना चाहते हैं, इसे समझाने के लिए उन्होंने व्यंग्य का प्रयोग किया है।  जी हैं , आजकल भी समाज में ऐसी विसंगतियाँ देखने को मिलतीं हैं।  लोग अपना स्वार्थ चलाने के के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं और अपना उल्लू सीधा होने पर अपने वचन से पीछे हटते हुए नहीं हिचकिचाते।  न्याय , एवं धर्म का इस युग में कोई अर्थ नहीं। 

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए :

उसकी आँसुओं से सनी आँखों में संकट और आतंक की गहरी छाप थी।

काठगोदाम के पास ख़्यूक्रिन को काटने बाद कुत्ते को ख़्यूक्रिन से मार खानी पड़ी. पिछली एक टाँग ऊपर होने के कारण उसे बहुत दर्द हो रहा था।  उसकी आँखों मार का दर्द और मर जाने का दर साफ झलक रहा था। 

कानून सम्मत तो यही है। ....... कि  अब सब लोग बराबर हैं।

ऐसा कहकर ख़्यूक्रिन यह बताना चाहता है कि कानूनी रूप से या कानून की नज़र में सब एक सामान हैं।  कोई अपने धन - दौलत के बल पर या पद के बल पर कानून को खरीद नहीं सकता।  जो अपराधी है उसे दंड अवश्य मिलेगा और जिसे पर अन्याय हुआ है उसे न्याय।  इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ख़्यूक्रिन एक मज़दूर है और कुत्ता जनरल साहब के भाई का।

हुज़ूर! यह तो जनशांति भांग हो जाने जैसा कुछ दिख रहा है।

यह येल्दीरीन का कथन है।  जब वह ओचुमेलॉव के साथ बाजार के गश्त लगा रहा था तो उसे काठगोदाम के पास भीड़ दिखाई पड़ी।  उसे परिस्थिति के बारे में कुछ जानकारी नहीं थी , तो उसे लगा कि  जनता ने भ्रष्ट सत्ताधिकारी और निर्दयी पुलिस के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया है।

समाप्त ! :)

पाठ से कुछ मुहावरे - proverbs from the lesson

त्योरियाँ चढ़ना - raised brows. When does that happen?! Exactly? Anger! So, simply put, it means to get angry over something or on someone.

विद्यार्थियों के शोरगुल पर प्रधानाचार्या जी ने त्योरियाँ चढ़ाई।

मत्थे मढ़ना - to dump - this means to shift one's blame on someone.

चतुर राजनीतिज्ञ ने गिरे हुए पुल का दोष रेत के व्यापारियों के मत्थे मढ़ दिया।

छुट्टी करना - to finish off - simply put, fire or scold.

अल्पाहार का समय समाप्त हुआ , जल्दी करो , वरना शिक्षिका जी हमारी छुट्टी कर देंगीं।

गाँठ बाँध लेना - remember - warning sort of thing.

it always starts in a filmy way (:P) मेरी बात गाँठ बाँध लो! अगर समय रहते तुमने अपनी आदत न बदली तो बाद में बहुत पछताओगे।

मज़ा चखाना - make someone pay (Yep! Revenge!) I'll make you pay for what you did! (HA HA!) मैं यह कभी नहीं भुलूँगा , तुम्हे ज़रूर मज़ा चखाऊंगा !
Surprisingly, many Bollywood movies use a generous dose of this "मज़ा चखाऊँगा " menu generously.

Wednesday, 15 February 2017

Hi Friends,

Since typing is a bit daunting, I'm making avail of this insert video / audio option to teach. I don't know about the quality of this video, it plays well on my device and hope so, it does on your device too. Its an explanation on Unit-8, Comparison for class - 10th, CBSE.

Love and Best Wishes,

Lakshmi. :)

Hi! :)

Hello Friends,

Greetings! :) Though, my computer is still giving me the creeps, I've decided to restart the blog posts anyway. It might take a bit longer than usual, but, yes, worth my time, as I'm feeling loads of guilt for being unable to help, here I am finally! :D Let's hope and pray, this works! :O

Love and best wishes,

Lakshmi! :)