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Wednesday, 27 July 2016

Tatara Vamiro ki katha!

प्र   वामीरो से मिलने के बाद तताँरा के जीवन में क्या परिवर्तन आया ?

उ  वामीरो से मिलने के बाद तताँरा का जीवन बिल्कुल बदल गया।  उसके मन में हर क्षण तताँरा की तस्वीर ही घूमती रहती।   उसेक मन वामीरो को लेकर कई कल्पानाएँ रचने लगा।  उसके जीवन में ऐसा पहली बार हुआ कि उसका मन इतना विचलित था।  उसे हर पल पहाड़  जैसे भारी लगने लगा।  वह शाम होने से पहले ही लपाती की उस समुद्री चट्टान पर जा कर बैठ जाता और वामीरो के आने की प्रतीक्षा करता रहता। 

प्र  प्राचीन काल में मनोरंजन और शक्ति-प्रदर्शन के लिए किस आयोजन किए जाते थे ?

उ  प्राचीन काल में मनोरंजन और शक्ति - प्रदर्शन के लिए पशु - पर्व का अतिरिक्त कुश्ती और मेलों का भी आयोजन होता था।  पशु - हृष्ट - पुष्ट पशुओं का प्रदर्शन किया जाता। था  युवक पशुओं से अपने बल की परीक्षा
करते थे , पशुओं को भी आपस में भिड़ाया जाता था।  इसमें सभी गाँववाले भाग लेते थे।  प्रतियोगिताओं के बाद नृत्य - संगीत एवं भोजन का भी आयोजन किया जाता था।

प्र   रूढ़ियाँ जब बंधन बन बोझ बनने लगे तब उनका टूट जाना ही अच्छा है।  क्यों? स्पष्ट कीजिए।

उ   हमारे पूर्वजों ने अपने समयानुसार सोच - समझकर कुछ रीतियाँ ऐसी बनाई हैं जो आजतक मान्य हैं, उनका पालन करना न केवल हमारा कर्तव्य है वरन उसमे हमारी भलाई भी है , जैसे मौसम के अनुसार कुछ त्यौहार और उनसे जुड़े खान - पान एवं संस्कृतियाँ , किन्तु कुछ रीतियाँ अब के समय के अनुसार बिलकुल ठीक नहीं , जैसे औरतों का घर से बाहर न निकलना। आज के युग में स्त्री एवं पुरुष दोनों ही समाज की उन्नति में सम भागीदार हैं।  तो हमें चाहिए कि अपनी बुद्धि का उपयोग करें और केवल उन्हीं रिवाजों को अपनाए जो आज के वक़्त के लिए ठीक हों।  तो यह कहना सही होगा कि  जब रूढ़ियाँ बंधन बन जाएँ तो उनका टूट जाना ही अच्छा है। 

प्र  जब कोई राह नहीं सूझी तो क्रोध का शमन करने के लिए उसमे (तलवार) शक्ति भर उसे धरती में घोंप दिया और ताकत से उसे खींचने लगा। 

उ  गाँववालों और तताँरा के माँ द्वारा किए गए अपमान से वामीरो बहुत क्रोधित हुआ।  उसका क्रोध बढ़ता ही गया, अपने क्रोध को शाँत करने के लिए उसने अपनी पूरी ताक़त से तलवार धरती के साइन में उतार दिया, जिससे धरती दो टुकड़ों में बँट गई और फिर वह अपनी तलवार को वापस खींचने लगा।  वह ऐसा इसलिए कर रहा था क्योंकि उसे लगा कि ऐसा करने से उसका अपमान जिस धरती पर हुआ उसे मिटा रहा हो।

प्र  बस आस की एक किरण थी जो समुद्र की देह पर डूबती किरणों की तरह कभी भी डूब सकती थी। 

उ  तताँरा को भी वामीरो से बहुत प्यार हो चुका था।  वह उसकी प्रतीक्षा में समुद्र किनारे आस लगाए बैठी थी।  वे दोनों फिर उसी संदरी चट्टान के पास मिलने वाले थे, जहाँ पहले मिले थे।  किन्तु समय के साथ - साथ उसका अधीर मन अपनी आशा खो रहा था।  साथ ही साथ आशा की एक किरण भी थी कि  वामीरो अवश्य आएगा।  सूरज की डूबती हुई किरणों के साथ उसे अपनी आशा भी डूबती नज़र आ रही थीं। 

समाप्त :-)

Seetha Lakshmi . :-)

०४-०८-२०१६

Wednesday, 20 July 2016

Diary ka ek panna! :)

Q .  विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रया हुई?

A .  श्रद्धानन्द पार्क में बंगाल प्रांतीय, विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने जब झंडा गाड़ा तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।  उनके साथ आए अन्य लोगों को मार-पीट कर वहां से हटाया।

Q .  लोग अपने - अपने मकानों व् सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का सन्देश देना चाहते थे ?

A .  लोग अपने - अपने मकान एवं सार्वजनिक स्थल पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर इस बात का सन्देश देना चाहते थे कि वे अपने - आप को स्वतन्त्र देश का वासी समझते हैं , अपने राष्ट्रीय झंडे का सम्मान करते हैं तथा उन्हें किसी का डर नहीं।

Q .  पुलिस ने - बड़े बड़े पार्कों को क्यों घेर लिया ?

A .  उस वक़्त स्वतंत्रता आंदोलन बड़े ज़ोर -शोर से चल रहा था।  लोग सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे , उस प्रदर्शन का मुख्य अंश था - सार्वजनिक स्थलों में एकत्रित होकर स्वंत्रता भाषण देना , झंडा फहराना, इत्यादि , पुलिस कमिश्नर यह नहीं चाहते थे कि इस आंदोलन को बढ़ावा मिले, इसलिए उन्होंने बड़े - बड़े पार्कों को घेर लिया।

Q. कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था ?

A . यह दिनांक इसलिए महत्त्वपूर्ण था क्योंकि इसे सारे भारतवर्ष में स्वतंत्रता की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जा रहा था।  यह दिन अंग्रेजी सरकार के खिलाफ स्वतंत्रता मनाने एवं अपना विरोध प्रकट करने के लिए कलकत्तावासियों के लिए एक सुनहरा मौक़ा था। 

Q . सुभाष बाबू के जुलुस का भार किस पर था ?

A.  सुभाष बाबू  जुलुस का भार पूर्णोदास पर था. उन्होंने कई जगह पर फोटो का प्रबंध किया , किन्तु बाद में पुलिस उन्हें पकड़ लिया। 

Q २६ जनवरी १९३१ के दिन को अमर बनाने क्या - तैयारियाँ की गई ?

A . कलकत्तावासियों के लिए २६ जनवरी १९३१ एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन था।  इस अमर बनाने के लिए शहर के लोगों ने एकजुट होकर क़रीब रुपए खर्च किए , विभिन्न भागों एवं घर - घर में झंडे फ़हराए , कार्यकर्ताओं ने घर -घर जाकर लोगों को समझाया।  ऐसा उत्सव का माहौल तैयार किया गया जैसे देश को पूर्ण स्वतंत्रता मिल गई हो। 

Q . 'आज जो बात थी वह निराली थी' - किस बात से पता चल रहा था किआज का दिन अपने आप में निराला है ? स्पष्ट कीजिए।

A . यह घटना सविनय अवज्ञा आंदोलन का एक सबसे बड़ा प्रतीक था।  निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद लोगों ने एकजुट होकर अपने विरोध तथा देश की स्वतंत्रता के प्रति अपने जोश का प्रदर्शन दिया।  तीन बजे से भीड़ जमा होने लगी , वे सब सभा के शुरू होने के इंतज़ार में थे।  न केवल सार्वजनिक स्थल किन्तु घर  - घर भी तिरंगा लहरता दिखाई दिया।  विशेष बात यह थी कि स्त्रियों ने भी जमकर भाग लिया , गिरफ्तार हुए , लाठियाँ खाई किन्तु उनका उत्साह ज़रा भी काम नहीं हुआ।  इसलिए कहा गया है कि वह दिन ही कुछ निराली थी। 

Q .  पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था ?

A .  पुलिस कमिश्नर के नोटिस में भय दिखाया गया कि अमुक धारा के तहत अगर किसी ने सभा में भाग लिया तो उसे दोषी समझा जाएगा दूसरी तरफ कौंसिल की नोटिस सरकार को एक खुली चुनौती थी जिसमे यह कहा गया था कि मोन्यूमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी।  सभी की उपस्तिथि अनिवार्य है।  यह दोनों नोटिस एक दूसरे के विरोध में विचार प्रकट कर रहे थे।  एक भय फैला रहा था तो दुसरा लोगों के अंदर की देशभक्ति को उकसा रही थी। 

Q . डॉ।  दासगुप्ता जुलुस में घायल लोगों की देख - रेख कर रहे थे , उनके फ़ोटो भी उतरवा रहे थे।  उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह थी ? स्पष्ट कीजिए।

A . डॉ।  दासगुप्ता द्वारा घायल लोगों की फोटो उतरवाने का कारण यह हो सकता है कि वे यह प्रत्यक्ष प्रमाण देशवासियों को दिखा सके , ताकि लोग अंग्रेजी सरकार की बर्बर व्यवहार देखकर प्रेरित एवं स्वतंत्रता आंदोलन में खुलकर भाग लें एवं ब्रिटिश सरकार की गलत नीतियों का खुलकर विरोध करें।

समाप्त! :)


सीता माँ ! :)

Friday, 15 July 2016

Lesson - 2 kaavya khand! :)

काव्य खण्ड

मीरा के पद

प्रश्नोत्तरी

प्र  १ पहले पद में मीरा ने हरि से अपणी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है ?

उ  १  मीरा श्री कृष्ण भगवान की परम भकत हैं।  वे उनसे विनती करते हुए गातीं हहैं कि  , 'हे प्रभो! आप सदैव अपने भक्तों की सख्त से रक्षा करते हैं, प्रह्लाद की कई दुष्कर स्तिथियों में रक्षा की, गजेंद्र को मगरमच्छ से बचाया , द्रौपदी चीर - हरण के समय उसकी लाज बचाने के लिए वस्त्र प्रदान किया , नृसिंम्ह रूप धारण कर हिरण्यकश्यप का वद किया, इत्यादि. इसी तरह इस दासी मीरा की पीड़ा भी हर लो प्रभो, मुझे अपनी शरण में ले लो। ' भावार्थ यह है, कि मीरा इस संसार को रोग मानती है, जिसमे बंधे रहने के कारण वे अपने को रोगी और श्री कृष्ण को अपना वैद्य मानती है, जो उन्हें मोक्ष प्रदान करने में सक्षम हैं।

Q.  दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती है ?

A  मीरा बाकी कृष्ण भक्तों की तरह कृष्ण दीवानी हैं. उन्हें सोते - जागते कृष्ण के ही चिंतन हैं।  वे एक क्षण के लिए भी कृष्ण स्मरण करना नहीं भूलतीं. वे कृष्ण की दासी बनकर रहना चाहतीं हैं , ताकि उनकी चाकरी अर्थात सेवा के बहाने कृष्ण का दर्शन पा सकें।  वे कृष्ण के नाम से बाग़ यानि बगीचा लगाना चाहतीं हैं, वृंदावन की गलियों में कृष्ण नाम का भजन करना चाहतीं हैं. दर्शन से आँखों को तृप्ति मिलेगी, नाम स्मरण रूपी खर्ची मिलेगी (meaning: no materal of this world can help a person better than God's name) , भाव-भक्ति रूपी जागीर मिलेगी इत्यादि।  उनका मानना हैं कि कृष्ण के दर्शन से नाम कीर्तन से इस संसार के बंधन से मुक्ति मिलेगी, मनुष्य - जन्म सफल होगा। 

Q  मीराबाई ने श्रीकृष्ण केरूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है ?

A  मीरा कृष्ण के प्रेम - रस में डूबी हैं उन्हें कृष्ण का मनमोहक रूप कुछ इस तरह वर्णन करतीं हैं , कृष्ण ने पीताम्बर यानि कि पीले वस्त्र पहने हुए हैं  सकर पर मुकुट, जिस पर मोर - पंख है  गले में वैजयंती माला शोभायमान है।  अपनी मुरली की मधुरता से वृंदावन के सभी प्राणियों को मोहित किए हुए हैं , धेनु अर्थात गाय चराते हैं।  मीराबाई वृंदावन में ऊँचे - ऊँचे महल बनाकर उसमे बने खिड़कियों से वृंदावन की गलियों को निहारना चाहतीं हैं ताकि उसमे से कहीं से भी श्री कृष्ण पर दृष्टी रख सकें।  वे कृष्ण के प्रेम में कुछ इस तरह दीवानी हैं , वे कहतीं हैं कि , 'हे प्रभु! यदि आधी रात भी हो जाए तो भी कोई परवाह नहीं, मुझे यमुना किनारे आकर दर्शन दे जाओ, मैं आपसे मिलने को व्याकुल हूँ , मैं लाल साड़ी पहनी आपकी प्रतीक्षा करुँगी ' .

समाप्त !
सीता माँ ! :-)





Wednesday, 6 July 2016

Workboook!

Chapter - 2

TENSES

There are three kinds of tenses. Past, Present and Future.

Past is what happened before.
Present means something that is happening and
Future is something that will happen.

Progress simply means to continue.

So, Present Progressive means that something that is happening at the moment of being talked about.

1. Ashwin is playing the piano.

2. Samar is cleaning his room.

3. Mother is making Gulab Jamuns.

4. Father is driving us to the school.

5. The teacher is teaching us Algebra . etc.

Present Perfect

Indicates any action that is still going on , that is at the moment of talking or which has stopped recently and has an impact on the present.

1.I have done my part.

2.She has cooked for us all.

3.They have played for our school.

4. I have been learning Japanese since 2015.

5 He drove 50 kilometres today.

Past Perfect

Simply put, it is describing a past event within another past event. Its like a dream inside a dream. I don't know how many of you had that experience. I have had. :)

1. The heavy rains destroyed the gate that we constructed a month back.

2.  When we reached the venue, the function had already begun.

3. I had not known the benefits of Ayurveda till I was 30.

4. The doctor took of the plaster that was put on 3 months before.

5. When she was driving back, the bridge was already closed.

Simple Past Tense

1. She went on a vacation last April.

2. The Tsunami submerged Dhanushkoti completely.

3. She was written off at first and accepted later on.

4. The 1947 partition, caused a huge communal riot.

5. The school was built in 1912.

Best Wishes,

Seetha Lakshmi! :)



Sanchayan Lesson - 1

हरिहर काका

बोध प्रश्न (from the textbook )

Q  कथावाचक और हरिहर काका क्या सम्बन्ध है और इसके क्या कारण हैं ?

A  हरिहर काका और कथावाचक / लेखक के बीच बहुत गहरा सम्बन्ध था।  दोनों एक ही गाँव के निवासी थे।  उन दोनों के बीच परिवार जैसे सम्बन्ध थे।  लेखक का काका के प्रति प्यार - सम्मान के दू मुख्य कारण थे :

१  वे दोनों पडोसी थे इसलिए सुख - दुःख में हमेशा साथ रहा।

२  लेखक को बचपन से काका ने पिता जैसे दुलार किया , जो लेखक के बड़े होने पर मित्रता में बदल गई।

Q   हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी में क्यों लगने लगे ?

A  हरिहर काका की अपनी कोई संतान न थी।  उनके पास पंद्रह बीघा ज़मीन था।  उनके भाइयों ने पहले तो उनकी खूब सेवा की किन्तु कुछ समय बाद उनकी साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया।  यह देखकर ठाकुरबारी के महन्त, काका को बहला - फुसलाकर अपने साथ ले गया।   उसने भी कुछ समय बाद काका से ज़मीन की माँग की , पर जब काका ने मना कर दिया , तो उन्हें मार - पीटकर उनसे ज़बरन कागज़ों पर अँगूठा लगवा लिया।  यह सब देखकर काका को लगा कि उनके भाई एवं महंत दोनों एक ही श्रेणी के हैं।

Q .  ठाकुरबारी के प्रति गाँववालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं उससे उनकी किस मनोवृत्त्ति का पता चलता है ?

A ठाकुरबारी गाँव का एक पुराना धार्मिक स्थल है।  माना जाता है कि कहीं से एक संत आकर वहाँ रहने लगे।  वे प्रतिदिन ठाकुर जी की पूजा करते थे।  तब गाँव में बहुत आबादी नहीं थी, पर जब लोगों की संख्या धीरे - धीरे बढ़ने लगी तो उन्होंने चंदा जमा किया और उससे ठाकुर जी के लिए एक छोटा - सा मंदिर बनवाया।  धीरे - धीरे मंदिर का विकास होने लगा।  लोग यह मानने लगे कि  ठाकुर जी की कृपा से ही उनकी सारी मन्नतें पूरी होतीं हैं जैसे, बच्चे का जन्म, नौकरी लगना , मुकदमे में जीत आदि।  वे बड़ी श्रद्धा से मंदिर में रुपये , ज़ेवर , अनाज आदि चढ़ाने लगे।  यह सारी बातें उनकी मंदिर के प्रति अंधी श्रद्धा को दर्शाती है।

Q . अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुइंया की बेहतर समझ रखते हैं - कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

A . हरिहर काका यह अच्छी तरह जानते थे कि उनके सगे -सम्बन्धी एवं गाँव के लोग उनका आदर उनकी ज़मीन -जायदाद की वजह से ही करते हैं।  अपने भाइयों और महंत के लाख समझाने पर भी उन्होंने अपना ज़मीन किसी के नाम नहीं किया।  इसका यह कारण था कि कुछ लोगों के अपने जीते जी जब सगे -सम्बन्धियों के नाम अपना जायदाद किया तो उनकी दशा बहुत दयनीय हो गई थी।  वे नहीं चाहते थे कि उनकी भी वही हालत हो।  

Q. हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे ? उन्होंने उनके साथ कैसा बर्ताव किया ?

A . महंत के भेजे हुए आदमी हरिहर काका को जबरन उठा कर ले गए. उन्होंने काका के साथ बहुत दुर्व्यवहार किया, पहले ततो उन्होंने काका को डराया - धमकाया, पर जब काम नहीं हुआ तो उन्हें मारा, पीटा , हाथ - पाँव बांधा, उनके मुँह में कपड़ा ठूँसा , फिर दस्तावेज़ों पर ज़बरदस्ती काका के अँगूठे का निशाँ लगवाया।  फिर उन्हें उसी कमरे में ताला बंद किया और इसी दयनीय स्तिथि में छोड़कर नौ दो ग्यारह हो गए। 

Q . हरिहर काका के गांववालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे ?

A . हरिहर काका के मामले में गांववाले दो पक्ष के हो गए थे. आधे लोग यह कहने लगे कि काका की ज़मीन पर परिवारवालों का हक़ बनता है इसलिए ज़मीन उनके नाम कर देनी चाहिए और बाकी लोगों का यह कहना था कि ज़मीन ठाकुरबारी के नाम करने पर उन्हें भगवान से मोक्ष की प्राप्ति होगी।  यह सब इसलिए हुआ क्योंकि काका विधुर (Widower ) थे और उनकी कोई संतान नहीं थी।  इसलिए सबका मन लालच से भर गया।

Q . कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा, "अज्ञान की स्तिथि में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं।  ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरन करने के लिए तैयार हो जाते हैं.

A . इस संसार में जो भी आता है उसकी मृत्यु एक दिन निश्चित है।  इस सत्य को सब जानते हैं पर कोई यह नहीं चाहता है उसकी मृत्यु हो, किन्तु जब विषम परिस्तिथियों से जब हमें गुज़रना पड़ता है और दुनिया के सच्चे रंग से आमना - सामना होता है तो मन करता है कि  ऐसे तिल -तिल रोज़-रोज़ मरने से तो यही अच्छा होगा कि एक ही झटके में मौत आ जाए।  हरिहर काका भी पहले अपने सम्पत्ति के प्रति मोह - पाश में फँसे रहते हैं पर जब उनके अपने भाई और महंत उनसे ज़बरदस्ती करतें हैं, तो उन्हें ज्ञान होता है और उनका मृत्यु के प्रति सम्पूर्ण दृष्टिकोण बदल जाता है।

Q . समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है ? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

A . में नैतिक मूल्यों की कोई अहमियत नहीं रही और उसे अपनाने वालों को लोग ओछी नज़रों से देखते हैं।  सभी रिश्ते-नाते स्वार्थ के आधार पर ठीके हुए हैं।  अच्छे या बुरे वक़्त में अपने पराए की पहचान हो जाती है। 
आजकल रिश्तों में बन्धुत्व काम और स्वार्थ ज़्यादा है , जब तक अपने स्वार्थ की पूर्ति होती है , तब तक रिश्ते कायम हैं ,छोटी-से छोटी समस्या के आने मात्र पर रिश्तों में दरार पड़ जाते हैं कभी-कभी रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं।  आजकल मानवता पर ध्यान धन-दौलत के पीछे इंसान ज़्यादा भागता है।  वह यह समझता है कि पैसे से सब है और अंत समय आने पर रिश्तों के लिए तरसता है।

Q . हरिहर काका के धार्मिक विचारों के बारे में बताइए।

A . हरिहर काका बहुत ही धार्मिक विचारों वाले व्यक्ति थे।  खेती के बाद का अधिकतर समय वे मंदिर में बिताते थे।  वे भजन - कीर्तन किया करते।  वे बहुत ही संस्कारी व्यक्ति थे।  लेखक जो पडोसी का बेटा था उसे अपने पुत्र जैसा मानते थे।  उनके पत्नी के मृत्यु हो जाने के बाद लोगों ने उन्हें पुनर्विवाह के लिए उकसाया किन्तु उन्होंने अपनी बढ़ती उम्र और धार्मिक संस्कारों के कारण मना कर दिया।  वे बहुत ही सहनशील व्यक्ति थे। 

समाप्त ! :)

सीता माँ  :)