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Wednesday, 23 November 2016

प्‌यारे विद्‌यार्‌थियों,

कुछ तीन महीनों से मैंने लिखना बंद किया, इसका कारण है, मेरा कंप्‌यूटर जो सही ढंग से काम नहीं कर रहा. दूसरे, कुछ ऐसी समस्‌याएँ हैं, जिन्‌हें मैं सुल्झाने में लगी हुई हूँ. ईश्‌वर की कृपा से कुछ दिन आप लोगों की सहायक रही, पर अभी असमर्‌थ हूँ. आशा है ईश्‌वर सहायता के और द्‌वार खोलेंगे.

लक्षमी.
Dear students,

As you can see I haven't written any posts for the past three months. One, my computer isn't cooperating, next some major upheavals in my personal life. Since I'm answerable, I thought of clarifying! God put me in your lives for sometime as a help. I'm hopeful that God will choose me again. At the same time I'm also sure God might have opened other avenues of help for you.

Praying for the best for all of us,
Love,
Lakshmi. :)

Tuesday, 23 August 2016

Parvat Pradesh Mein Pavas!

पर्वत प्रदेश में पावस

प्र   पावस ऋतु में प्रकृति में कौन - कौन से परिवर्तन आते हैं ? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उ  वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही प्रकृति एक सजी हुई दुल्हन की तरह दिखाई देती है।  इस ऋतु में निम्नलिखित परिवर्तन दिखाई पड़ते हैं :

क   विशालकाय पर्वत का प्रतिबिम्ब तालाब के स्वच्छ जल में दिखाई पड़ता है।

ख   पर्वत पर कई पुष्प खिल जाते हैं।

ग   झरनों में भरपूर पानी बहता है।

घ  पेड़ - पौधे एवं वृक्ष खूब बढ़ते हैं। 

बादलों के पर पर्वत अदृश्य हो जाता है।

च  हर जगह धुँआ -धुँआ हो जाता है

प्र  'मेखलाकार' शब्द का क्या अर्थ है ? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहां क्यों किया है ?

उ  'मेखलाकार' शब्द का अर्थ है - एक हार के समान वाली आकृति।  यह एक आभूषण है जो कमर में पहनी जाती है।  इसी तरह कवि की कल्पना में पूरे पर्वत ने पृथ्वी को मानो अपने रूप से घेर लिया हो।

प्र   'सहस्र दृग - सुमन' से क्या तात्पर्य है ? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए किया होगा ?

उ  'सहस्र दृग - सुमन ' का अर्थ है ' हज़ारों फूलों के समान आँखें ' . इसका प्रयोग कवि  इ पर्वत पर खिले सैकड़ों फूलों के लिए किया है।  वर्षा - ऋतु में पर्वत पर कई तरह के फूल खिल जाते हैं।  कवि  की कल्पना के अनुसार पर्वत अपने पर खिले इन सैकड़ों आँखों से अपना प्रतिबिम्ब निचे फैले तालाब के स्वच्छ जल में देखता होगा।

प्र   कवि  ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों ?

उ  कवि तालाब को दर्पण बताते हैं , यह उपमा यहां इसलिए दी गई है क्योंकि तालाब का पानी बहुत ही साफ़ है।  इसमें प्रतिबिम्ब दिखाई पड़ता है।  वह पारदर्शी है, दर्पण के समान।  इसलिए यहाँ तालाब के पानी की तुलना दर्पण से की गई है।

प्र   पर्वत के ह्रदय से उठकर ऊँचे - ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर  क्यों देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं ?

उ  कवि की अति सुन्दर कल्पना के अनुसार पर्वत के ह्रदय से निकले वृक्ष आकाश की ओर मानो लक्ष्य साधे खड़े हैं , मानो हमें यह सन्देश दे रहे हैं कि लक्ष्य को पाना हो तो स्थिर रहो, मौन रहो और लक्ष्य की ओर बढ़ते चलो।

प्र   शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गए ?

उ  यह एक कवि ही कल्पना कर सकता है।  उनकी दृष्टि में इस गहन वर्षा में चारों ओर धुँआ ही धुँआ छाया है।  पर्वत, झरने सब इस धुएँ के पीछे अदृश्य हो गए हैं।  इस भयंकर बारिश को देख मानो शाल वृक्ष भय के मारे धरती में धँस गए हैं।

प्र   झरने किसके गौरव का गान कर रहें हैं ? बहते हुए झरने की तुलना किससे की गई है ?

उ  झरने पर्वत के गौरव का गान कर रहे हैं।  बहते हुए बे मोतियों की लड़ियों के समान उसका पानी प्रतीत होता है।  उनकी कल - कल करती हुई मधुरिम ध्वनि मानो पर्वत के गौरव का गान गया रहीं हैं।

बाकी बाद में। 

लक्ष्मी

Thursday, 4 August 2016

Hello dear friends,

This post is about the next unit on Subject - Verb Agreement.

Its very simple. :) If the subject is singular the verb is too and if its plural the verb is plural too .

The student is very bright.

The students are  bright.

I've highlighted the subject and verb for convenience. :)

Let's do some exercises / examples from your textbook.

*  Is it true that the students from the Space Research Centre are arriving this evening?

*  I agree. The constellation they are going to observe is clearly visible from here?
constellation - is    they-are

*  No, their manager called this morning. The supervisor is busy making arrangements for the committee which is to arrive tomorrow.
manager-called supervisor-is committee-is

*  Yes, this news is true.

*  Yes, but that does not mean that good people should not join politics.

*  When the pickup bus that we have sent to the railway station arrives here, we may need help to shift the luggage which, I presume, is going to be very heavy .
bus-arrives  we-may need  luggage-is going.

There are certain nouns that end with an 's' , but that does not mean they are plural, for e.g, the names of some subjects, Mathematics, Physics, Statistics, Economics, Electronics and some field of sports such as aerobics, gymnastics and dramatics, etc are not plural, but very much singular.

Then there are some diseases, like Diabetes, Measles, Rabies etc, which are singular too .

In the above - mentioned nouns, we use a singular verb.

Now, what does one make of the word 'scissors'? Confusing hanh? It is one object, but a part of the whole, it can't be singled out as a scissor, since there are two blades that make this one item, it is known as scissors, ditto for socks, (sing. - sock) binoculars, shears, trousers, tongs, goggles, slacks, so on and so forth . For these we use the plural form of verb.

Next, coming to very large sentences, where extra information other than the main subjects is splashed across, you need to keep your focus on the main subject and choose the verb I;e singular or plural, accordingly.

The boy whom you saw walking on the road yesterday while returning from school is my brother.

In this sentence, the main subject is "The Boy" , who was obviously walking down the road the day before, whom the person being talked to while they were returning from school. Lots of extra information like, walking down the road, you saw while coming back from school, etc. etc. :( Do not get confused, just focus on "The Boy" and choose, since it is singular, so will be the verb. :)

One of my friends, has / have gone to Canada?
Ans: has, why, because not all friends, but only one of the, hence a singular verb.
Ditto for, one of the , Everyone, None of the, Neither of them, etc. etc.

This and that or the combination of any two singular nouns is always followed by a plural verb.

Ram and Shyam do not like summer.

This or that or the inclusion of any one of the mentioned nouns, either etc. is followed by a singular verb.

Either Ram or Shyam has made this mega project.

In case two different nouns are there but denote a single subject = singular verb.

If two different nouns denote two different persons  = plural verb.

So on and so forth. I'm pretty sure that you might've got some idea about this. Don't worry I'll give more exercises on this post later on.

Best wishes,

Seetha Lakshmi! :-)

Wednesday, 27 July 2016

Tatara Vamiro ki katha!

प्र   वामीरो से मिलने के बाद तताँरा के जीवन में क्या परिवर्तन आया ?

उ  वामीरो से मिलने के बाद तताँरा का जीवन बिल्कुल बदल गया।  उसके मन में हर क्षण तताँरा की तस्वीर ही घूमती रहती।   उसेक मन वामीरो को लेकर कई कल्पानाएँ रचने लगा।  उसके जीवन में ऐसा पहली बार हुआ कि उसका मन इतना विचलित था।  उसे हर पल पहाड़  जैसे भारी लगने लगा।  वह शाम होने से पहले ही लपाती की उस समुद्री चट्टान पर जा कर बैठ जाता और वामीरो के आने की प्रतीक्षा करता रहता। 

प्र  प्राचीन काल में मनोरंजन और शक्ति-प्रदर्शन के लिए किस आयोजन किए जाते थे ?

उ  प्राचीन काल में मनोरंजन और शक्ति - प्रदर्शन के लिए पशु - पर्व का अतिरिक्त कुश्ती और मेलों का भी आयोजन होता था।  पशु - हृष्ट - पुष्ट पशुओं का प्रदर्शन किया जाता। था  युवक पशुओं से अपने बल की परीक्षा
करते थे , पशुओं को भी आपस में भिड़ाया जाता था।  इसमें सभी गाँववाले भाग लेते थे।  प्रतियोगिताओं के बाद नृत्य - संगीत एवं भोजन का भी आयोजन किया जाता था।

प्र   रूढ़ियाँ जब बंधन बन बोझ बनने लगे तब उनका टूट जाना ही अच्छा है।  क्यों? स्पष्ट कीजिए।

उ   हमारे पूर्वजों ने अपने समयानुसार सोच - समझकर कुछ रीतियाँ ऐसी बनाई हैं जो आजतक मान्य हैं, उनका पालन करना न केवल हमारा कर्तव्य है वरन उसमे हमारी भलाई भी है , जैसे मौसम के अनुसार कुछ त्यौहार और उनसे जुड़े खान - पान एवं संस्कृतियाँ , किन्तु कुछ रीतियाँ अब के समय के अनुसार बिलकुल ठीक नहीं , जैसे औरतों का घर से बाहर न निकलना। आज के युग में स्त्री एवं पुरुष दोनों ही समाज की उन्नति में सम भागीदार हैं।  तो हमें चाहिए कि अपनी बुद्धि का उपयोग करें और केवल उन्हीं रिवाजों को अपनाए जो आज के वक़्त के लिए ठीक हों।  तो यह कहना सही होगा कि  जब रूढ़ियाँ बंधन बन जाएँ तो उनका टूट जाना ही अच्छा है। 

प्र  जब कोई राह नहीं सूझी तो क्रोध का शमन करने के लिए उसमे (तलवार) शक्ति भर उसे धरती में घोंप दिया और ताकत से उसे खींचने लगा। 

उ  गाँववालों और तताँरा के माँ द्वारा किए गए अपमान से वामीरो बहुत क्रोधित हुआ।  उसका क्रोध बढ़ता ही गया, अपने क्रोध को शाँत करने के लिए उसने अपनी पूरी ताक़त से तलवार धरती के साइन में उतार दिया, जिससे धरती दो टुकड़ों में बँट गई और फिर वह अपनी तलवार को वापस खींचने लगा।  वह ऐसा इसलिए कर रहा था क्योंकि उसे लगा कि ऐसा करने से उसका अपमान जिस धरती पर हुआ उसे मिटा रहा हो।

प्र  बस आस की एक किरण थी जो समुद्र की देह पर डूबती किरणों की तरह कभी भी डूब सकती थी। 

उ  तताँरा को भी वामीरो से बहुत प्यार हो चुका था।  वह उसकी प्रतीक्षा में समुद्र किनारे आस लगाए बैठी थी।  वे दोनों फिर उसी संदरी चट्टान के पास मिलने वाले थे, जहाँ पहले मिले थे।  किन्तु समय के साथ - साथ उसका अधीर मन अपनी आशा खो रहा था।  साथ ही साथ आशा की एक किरण भी थी कि  वामीरो अवश्य आएगा।  सूरज की डूबती हुई किरणों के साथ उसे अपनी आशा भी डूबती नज़र आ रही थीं। 

समाप्त :-)

Seetha Lakshmi . :-)

०४-०८-२०१६

Wednesday, 20 July 2016

Diary ka ek panna! :)

Q .  विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रया हुई?

A .  श्रद्धानन्द पार्क में बंगाल प्रांतीय, विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने जब झंडा गाड़ा तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।  उनके साथ आए अन्य लोगों को मार-पीट कर वहां से हटाया।

Q .  लोग अपने - अपने मकानों व् सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का सन्देश देना चाहते थे ?

A .  लोग अपने - अपने मकान एवं सार्वजनिक स्थल पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर इस बात का सन्देश देना चाहते थे कि वे अपने - आप को स्वतन्त्र देश का वासी समझते हैं , अपने राष्ट्रीय झंडे का सम्मान करते हैं तथा उन्हें किसी का डर नहीं।

Q .  पुलिस ने - बड़े बड़े पार्कों को क्यों घेर लिया ?

A .  उस वक़्त स्वतंत्रता आंदोलन बड़े ज़ोर -शोर से चल रहा था।  लोग सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे , उस प्रदर्शन का मुख्य अंश था - सार्वजनिक स्थलों में एकत्रित होकर स्वंत्रता भाषण देना , झंडा फहराना, इत्यादि , पुलिस कमिश्नर यह नहीं चाहते थे कि इस आंदोलन को बढ़ावा मिले, इसलिए उन्होंने बड़े - बड़े पार्कों को घेर लिया।

Q. कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था ?

A . यह दिनांक इसलिए महत्त्वपूर्ण था क्योंकि इसे सारे भारतवर्ष में स्वतंत्रता की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जा रहा था।  यह दिन अंग्रेजी सरकार के खिलाफ स्वतंत्रता मनाने एवं अपना विरोध प्रकट करने के लिए कलकत्तावासियों के लिए एक सुनहरा मौक़ा था। 

Q . सुभाष बाबू के जुलुस का भार किस पर था ?

A.  सुभाष बाबू  जुलुस का भार पूर्णोदास पर था. उन्होंने कई जगह पर फोटो का प्रबंध किया , किन्तु बाद में पुलिस उन्हें पकड़ लिया। 

Q २६ जनवरी १९३१ के दिन को अमर बनाने क्या - तैयारियाँ की गई ?

A . कलकत्तावासियों के लिए २६ जनवरी १९३१ एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन था।  इस अमर बनाने के लिए शहर के लोगों ने एकजुट होकर क़रीब रुपए खर्च किए , विभिन्न भागों एवं घर - घर में झंडे फ़हराए , कार्यकर्ताओं ने घर -घर जाकर लोगों को समझाया।  ऐसा उत्सव का माहौल तैयार किया गया जैसे देश को पूर्ण स्वतंत्रता मिल गई हो। 

Q . 'आज जो बात थी वह निराली थी' - किस बात से पता चल रहा था किआज का दिन अपने आप में निराला है ? स्पष्ट कीजिए।

A . यह घटना सविनय अवज्ञा आंदोलन का एक सबसे बड़ा प्रतीक था।  निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद लोगों ने एकजुट होकर अपने विरोध तथा देश की स्वतंत्रता के प्रति अपने जोश का प्रदर्शन दिया।  तीन बजे से भीड़ जमा होने लगी , वे सब सभा के शुरू होने के इंतज़ार में थे।  न केवल सार्वजनिक स्थल किन्तु घर  - घर भी तिरंगा लहरता दिखाई दिया।  विशेष बात यह थी कि स्त्रियों ने भी जमकर भाग लिया , गिरफ्तार हुए , लाठियाँ खाई किन्तु उनका उत्साह ज़रा भी काम नहीं हुआ।  इसलिए कहा गया है कि वह दिन ही कुछ निराली थी। 

Q .  पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था ?

A .  पुलिस कमिश्नर के नोटिस में भय दिखाया गया कि अमुक धारा के तहत अगर किसी ने सभा में भाग लिया तो उसे दोषी समझा जाएगा दूसरी तरफ कौंसिल की नोटिस सरकार को एक खुली चुनौती थी जिसमे यह कहा गया था कि मोन्यूमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी।  सभी की उपस्तिथि अनिवार्य है।  यह दोनों नोटिस एक दूसरे के विरोध में विचार प्रकट कर रहे थे।  एक भय फैला रहा था तो दुसरा लोगों के अंदर की देशभक्ति को उकसा रही थी। 

Q . डॉ।  दासगुप्ता जुलुस में घायल लोगों की देख - रेख कर रहे थे , उनके फ़ोटो भी उतरवा रहे थे।  उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह थी ? स्पष्ट कीजिए।

A . डॉ।  दासगुप्ता द्वारा घायल लोगों की फोटो उतरवाने का कारण यह हो सकता है कि वे यह प्रत्यक्ष प्रमाण देशवासियों को दिखा सके , ताकि लोग अंग्रेजी सरकार की बर्बर व्यवहार देखकर प्रेरित एवं स्वतंत्रता आंदोलन में खुलकर भाग लें एवं ब्रिटिश सरकार की गलत नीतियों का खुलकर विरोध करें।

समाप्त! :)


सीता माँ ! :)

Friday, 15 July 2016

Lesson - 2 kaavya khand! :)

काव्य खण्ड

मीरा के पद

प्रश्नोत्तरी

प्र  १ पहले पद में मीरा ने हरि से अपणी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है ?

उ  १  मीरा श्री कृष्ण भगवान की परम भकत हैं।  वे उनसे विनती करते हुए गातीं हहैं कि  , 'हे प्रभो! आप सदैव अपने भक्तों की सख्त से रक्षा करते हैं, प्रह्लाद की कई दुष्कर स्तिथियों में रक्षा की, गजेंद्र को मगरमच्छ से बचाया , द्रौपदी चीर - हरण के समय उसकी लाज बचाने के लिए वस्त्र प्रदान किया , नृसिंम्ह रूप धारण कर हिरण्यकश्यप का वद किया, इत्यादि. इसी तरह इस दासी मीरा की पीड़ा भी हर लो प्रभो, मुझे अपनी शरण में ले लो। ' भावार्थ यह है, कि मीरा इस संसार को रोग मानती है, जिसमे बंधे रहने के कारण वे अपने को रोगी और श्री कृष्ण को अपना वैद्य मानती है, जो उन्हें मोक्ष प्रदान करने में सक्षम हैं।

Q.  दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती है ?

A  मीरा बाकी कृष्ण भक्तों की तरह कृष्ण दीवानी हैं. उन्हें सोते - जागते कृष्ण के ही चिंतन हैं।  वे एक क्षण के लिए भी कृष्ण स्मरण करना नहीं भूलतीं. वे कृष्ण की दासी बनकर रहना चाहतीं हैं , ताकि उनकी चाकरी अर्थात सेवा के बहाने कृष्ण का दर्शन पा सकें।  वे कृष्ण के नाम से बाग़ यानि बगीचा लगाना चाहतीं हैं, वृंदावन की गलियों में कृष्ण नाम का भजन करना चाहतीं हैं. दर्शन से आँखों को तृप्ति मिलेगी, नाम स्मरण रूपी खर्ची मिलेगी (meaning: no materal of this world can help a person better than God's name) , भाव-भक्ति रूपी जागीर मिलेगी इत्यादि।  उनका मानना हैं कि कृष्ण के दर्शन से नाम कीर्तन से इस संसार के बंधन से मुक्ति मिलेगी, मनुष्य - जन्म सफल होगा। 

Q  मीराबाई ने श्रीकृष्ण केरूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है ?

A  मीरा कृष्ण के प्रेम - रस में डूबी हैं उन्हें कृष्ण का मनमोहक रूप कुछ इस तरह वर्णन करतीं हैं , कृष्ण ने पीताम्बर यानि कि पीले वस्त्र पहने हुए हैं  सकर पर मुकुट, जिस पर मोर - पंख है  गले में वैजयंती माला शोभायमान है।  अपनी मुरली की मधुरता से वृंदावन के सभी प्राणियों को मोहित किए हुए हैं , धेनु अर्थात गाय चराते हैं।  मीराबाई वृंदावन में ऊँचे - ऊँचे महल बनाकर उसमे बने खिड़कियों से वृंदावन की गलियों को निहारना चाहतीं हैं ताकि उसमे से कहीं से भी श्री कृष्ण पर दृष्टी रख सकें।  वे कृष्ण के प्रेम में कुछ इस तरह दीवानी हैं , वे कहतीं हैं कि , 'हे प्रभु! यदि आधी रात भी हो जाए तो भी कोई परवाह नहीं, मुझे यमुना किनारे आकर दर्शन दे जाओ, मैं आपसे मिलने को व्याकुल हूँ , मैं लाल साड़ी पहनी आपकी प्रतीक्षा करुँगी ' .

समाप्त !
सीता माँ ! :-)





Wednesday, 6 July 2016

Workboook!

Chapter - 2

TENSES

There are three kinds of tenses. Past, Present and Future.

Past is what happened before.
Present means something that is happening and
Future is something that will happen.

Progress simply means to continue.

So, Present Progressive means that something that is happening at the moment of being talked about.

1. Ashwin is playing the piano.

2. Samar is cleaning his room.

3. Mother is making Gulab Jamuns.

4. Father is driving us to the school.

5. The teacher is teaching us Algebra . etc.

Present Perfect

Indicates any action that is still going on , that is at the moment of talking or which has stopped recently and has an impact on the present.

1.I have done my part.

2.She has cooked for us all.

3.They have played for our school.

4. I have been learning Japanese since 2015.

5 He drove 50 kilometres today.

Past Perfect

Simply put, it is describing a past event within another past event. Its like a dream inside a dream. I don't know how many of you had that experience. I have had. :)

1. The heavy rains destroyed the gate that we constructed a month back.

2.  When we reached the venue, the function had already begun.

3. I had not known the benefits of Ayurveda till I was 30.

4. The doctor took of the plaster that was put on 3 months before.

5. When she was driving back, the bridge was already closed.

Simple Past Tense

1. She went on a vacation last April.

2. The Tsunami submerged Dhanushkoti completely.

3. She was written off at first and accepted later on.

4. The 1947 partition, caused a huge communal riot.

5. The school was built in 1912.

Best Wishes,

Seetha Lakshmi! :)



Sanchayan Lesson - 1

हरिहर काका

बोध प्रश्न (from the textbook )

Q  कथावाचक और हरिहर काका क्या सम्बन्ध है और इसके क्या कारण हैं ?

A  हरिहर काका और कथावाचक / लेखक के बीच बहुत गहरा सम्बन्ध था।  दोनों एक ही गाँव के निवासी थे।  उन दोनों के बीच परिवार जैसे सम्बन्ध थे।  लेखक का काका के प्रति प्यार - सम्मान के दू मुख्य कारण थे :

१  वे दोनों पडोसी थे इसलिए सुख - दुःख में हमेशा साथ रहा।

२  लेखक को बचपन से काका ने पिता जैसे दुलार किया , जो लेखक के बड़े होने पर मित्रता में बदल गई।

Q   हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी में क्यों लगने लगे ?

A  हरिहर काका की अपनी कोई संतान न थी।  उनके पास पंद्रह बीघा ज़मीन था।  उनके भाइयों ने पहले तो उनकी खूब सेवा की किन्तु कुछ समय बाद उनकी साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया।  यह देखकर ठाकुरबारी के महन्त, काका को बहला - फुसलाकर अपने साथ ले गया।   उसने भी कुछ समय बाद काका से ज़मीन की माँग की , पर जब काका ने मना कर दिया , तो उन्हें मार - पीटकर उनसे ज़बरन कागज़ों पर अँगूठा लगवा लिया।  यह सब देखकर काका को लगा कि उनके भाई एवं महंत दोनों एक ही श्रेणी के हैं।

Q .  ठाकुरबारी के प्रति गाँववालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं उससे उनकी किस मनोवृत्त्ति का पता चलता है ?

A ठाकुरबारी गाँव का एक पुराना धार्मिक स्थल है।  माना जाता है कि कहीं से एक संत आकर वहाँ रहने लगे।  वे प्रतिदिन ठाकुर जी की पूजा करते थे।  तब गाँव में बहुत आबादी नहीं थी, पर जब लोगों की संख्या धीरे - धीरे बढ़ने लगी तो उन्होंने चंदा जमा किया और उससे ठाकुर जी के लिए एक छोटा - सा मंदिर बनवाया।  धीरे - धीरे मंदिर का विकास होने लगा।  लोग यह मानने लगे कि  ठाकुर जी की कृपा से ही उनकी सारी मन्नतें पूरी होतीं हैं जैसे, बच्चे का जन्म, नौकरी लगना , मुकदमे में जीत आदि।  वे बड़ी श्रद्धा से मंदिर में रुपये , ज़ेवर , अनाज आदि चढ़ाने लगे।  यह सारी बातें उनकी मंदिर के प्रति अंधी श्रद्धा को दर्शाती है।

Q . अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुइंया की बेहतर समझ रखते हैं - कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

A . हरिहर काका यह अच्छी तरह जानते थे कि उनके सगे -सम्बन्धी एवं गाँव के लोग उनका आदर उनकी ज़मीन -जायदाद की वजह से ही करते हैं।  अपने भाइयों और महंत के लाख समझाने पर भी उन्होंने अपना ज़मीन किसी के नाम नहीं किया।  इसका यह कारण था कि कुछ लोगों के अपने जीते जी जब सगे -सम्बन्धियों के नाम अपना जायदाद किया तो उनकी दशा बहुत दयनीय हो गई थी।  वे नहीं चाहते थे कि उनकी भी वही हालत हो।  

Q. हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे ? उन्होंने उनके साथ कैसा बर्ताव किया ?

A . महंत के भेजे हुए आदमी हरिहर काका को जबरन उठा कर ले गए. उन्होंने काका के साथ बहुत दुर्व्यवहार किया, पहले ततो उन्होंने काका को डराया - धमकाया, पर जब काम नहीं हुआ तो उन्हें मारा, पीटा , हाथ - पाँव बांधा, उनके मुँह में कपड़ा ठूँसा , फिर दस्तावेज़ों पर ज़बरदस्ती काका के अँगूठे का निशाँ लगवाया।  फिर उन्हें उसी कमरे में ताला बंद किया और इसी दयनीय स्तिथि में छोड़कर नौ दो ग्यारह हो गए। 

Q . हरिहर काका के गांववालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे ?

A . हरिहर काका के मामले में गांववाले दो पक्ष के हो गए थे. आधे लोग यह कहने लगे कि काका की ज़मीन पर परिवारवालों का हक़ बनता है इसलिए ज़मीन उनके नाम कर देनी चाहिए और बाकी लोगों का यह कहना था कि ज़मीन ठाकुरबारी के नाम करने पर उन्हें भगवान से मोक्ष की प्राप्ति होगी।  यह सब इसलिए हुआ क्योंकि काका विधुर (Widower ) थे और उनकी कोई संतान नहीं थी।  इसलिए सबका मन लालच से भर गया।

Q . कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा, "अज्ञान की स्तिथि में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं।  ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरन करने के लिए तैयार हो जाते हैं.

A . इस संसार में जो भी आता है उसकी मृत्यु एक दिन निश्चित है।  इस सत्य को सब जानते हैं पर कोई यह नहीं चाहता है उसकी मृत्यु हो, किन्तु जब विषम परिस्तिथियों से जब हमें गुज़रना पड़ता है और दुनिया के सच्चे रंग से आमना - सामना होता है तो मन करता है कि  ऐसे तिल -तिल रोज़-रोज़ मरने से तो यही अच्छा होगा कि एक ही झटके में मौत आ जाए।  हरिहर काका भी पहले अपने सम्पत्ति के प्रति मोह - पाश में फँसे रहते हैं पर जब उनके अपने भाई और महंत उनसे ज़बरदस्ती करतें हैं, तो उन्हें ज्ञान होता है और उनका मृत्यु के प्रति सम्पूर्ण दृष्टिकोण बदल जाता है।

Q . समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है ? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

A . में नैतिक मूल्यों की कोई अहमियत नहीं रही और उसे अपनाने वालों को लोग ओछी नज़रों से देखते हैं।  सभी रिश्ते-नाते स्वार्थ के आधार पर ठीके हुए हैं।  अच्छे या बुरे वक़्त में अपने पराए की पहचान हो जाती है। 
आजकल रिश्तों में बन्धुत्व काम और स्वार्थ ज़्यादा है , जब तक अपने स्वार्थ की पूर्ति होती है , तब तक रिश्ते कायम हैं ,छोटी-से छोटी समस्या के आने मात्र पर रिश्तों में दरार पड़ जाते हैं कभी-कभी रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं।  आजकल मानवता पर ध्यान धन-दौलत के पीछे इंसान ज़्यादा भागता है।  वह यह समझता है कि पैसे से सब है और अंत समय आने पर रिश्तों के लिए तरसता है।

Q . हरिहर काका के धार्मिक विचारों के बारे में बताइए।

A . हरिहर काका बहुत ही धार्मिक विचारों वाले व्यक्ति थे।  खेती के बाद का अधिकतर समय वे मंदिर में बिताते थे।  वे भजन - कीर्तन किया करते।  वे बहुत ही संस्कारी व्यक्ति थे।  लेखक जो पडोसी का बेटा था उसे अपने पुत्र जैसा मानते थे।  उनके पत्नी के मृत्यु हो जाने के बाद लोगों ने उन्हें पुनर्विवाह के लिए उकसाया किन्तु उन्होंने अपनी बढ़ती उम्र और धार्मिक संस्कारों के कारण मना कर दिया।  वे बहुत ही सहनशील व्यक्ति थे। 

समाप्त ! :)

सीता माँ  :)

Thursday, 16 June 2016

BadeBhai Saaheb! :)

Q .  छोटे भाई ने अपनी पढाई का टाइम - टेबिल बनाते समय क्या - क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया ?

A .  टाइम - टेबिल (समय - सारणी) बनाते समय छोटे भाई ने सभी विषय के लिए टाईम - टेबिल बना डाली किन्तु स्वछंद स्वभाव के होने के कारण मित्रों के टोलियों के साथ घूमना, फुटबॉल एवं अन्य खेल में रूचि, पतंगबाज़ी तथा दीवार फाँदने जैसे विषय उसे अपनी ओर आकर्षित करते रहे, जिस वजह से वह अपने टाईम -टेबिल का पालन नहीं कर पाया।

Q .  एक दिन जब गुल्ली - डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुंचा तो उनकी क्या प्रतिक्रया हुई ?

A .  एक दिन जब छोटा भाई गुल्ली - डंडा खेलकर ठीक रात के भोजन के समय घर पहुंचा, तो अपने बड़े भाई को बहुत क्रोधित देखा। बड़े भाई साहब उस पर टूट पड़े और कहने लगे कि उसे बिन पढ़ाई के अव्वल आने पर बहुत घमद हो गया है।  इतना घमंड ठीक नहीं।  अच्छे - अच्छे लोग घमंड की वजह से जीवन में विनाश हो गए हैं।  सफल खिलाड़ी वही है , जो कभी नहीं हारता और उनका मानना था कि दादाजी की गाढ़ी कमाई का इस तरह दुरूपयोग करना ठीक नहीं।  अगर गुल्ली - डंडा ही खेलना है तो छोटा भाई का घर वापस चले जाना ही ठीक होगा।

Q . बड़े भाई को अपने मन की इच्छाओं को  क्यों दबानी पड़ती थीं ?

A . बड़े भाई को अपने बड़े होने के कारण छोटे भाई के लिए एक अच्छा आदर्श बनना पड़ता था , जिस कारण उन्हें अपनी इच्छाएँ जैसे खेल-कूद, मौज -मस्ती इत्यादि पर नियंत्रण रखना पड़ता था।  उनका मानना था कि  अगर वे स्वयं ही राह भटक जाएँ तो छोटे भाई का क्या होगा।  इसलिए उन्हें अपने इच्छाओं को पढ़ाई की वेदी पर बलि चढ़ानी पड़ी क्योंकि वे जानते थे कि  काफ़ी मुश्किलों के बाद ही दादाजी ने उन दोनों को पढ़ने के लिए भेजा था।

Q . बड़े भाई छोटे भी को क्या सलाह देते थे ?

A . बड़े भाई छोटे भाई को अधिकाधिक परिश्रम करने की सलाह देते थे।  वे कहते थे कि  बिना पढाई किए कोई एक बार ही उत्तीर्ण हो सकता है, किस्मत बार - बार साथ नहीं देती।  खेल - कूद या अन्य मनोरंजन में बहुत ज़्यादा समय व्यर्थ करना ठीक नहीं।  किताबों के साथ - साथ सांसारिक अनुभव का होना भी ज़रूरी है।  पढ़ाई में अव्वल आने के लिए इच्छाओं पड़ता है, आँखें फोडनी पड़ती है , खून जलाना पड़ता है।  घमंड करना अच्छी बात नहीं विनाश का कारण है। 

Q . छोटे भाई ने बड़े भाई के नरम व्यवहार का क्या फायदा उठाया ?

A . जब एक बार फिर छोटा भाई पास और बड़ा भाई फ़ेल हो गया तो बड़े भाई के स्वभाव में काफ़ी नरमी आ गई. इसका छोटे भाई ने भरपूर फायदा उठाया।  वह यह समझने लगा कि  अब बिना पढाई किए ही वह पास हो सकता है. उसका सारा समय अब पतंगबाज़ी, मांझा बाँधने, कन्ने बाँधने , प्रतियोगिता की तैयारी आदि में बीतने लगा।  उसके मन में अपने बड़े भाई दर और आदर धीरे - धीरे काम होने लगा।

Q . आपके विचार से क्या छोटे भाई अच्छे हैं या अपने बड़े भाई की वजह से पास हुए ?

A . छोटा भाई बहुत ही शैतान था।  उसे एक घंटा भी  पढ़ाई करना पहाड़ के समान लगता था।  उसका मन हमेशा खेल - कूद, पतंगबाज़ी , ककरियाँ उछालना , चारदीवारी चढ़ना आदि में लगता था , किन्तु घंटा - दो घंटा बर्बाद करने के बाद बड़े भाई की डाँट -डपट सुनकर या सुनने के दर से वह खूब मन लगाकर परिश्रम करता था।  यही कारण था कि  काम समय पढ़ने के बाद भी वह अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो जाता. इसलिए मेरे विचार से उसकी सफलता में बड़े भाई की भूमिका अहम है।

Q . इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के बारे में क्या बताया है ?

A  . "बड़े भाई साहब पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा - प्रणाली पर व्यंग्य किया है।  वे कहते हैं, कि  तत्कालीन शिक्षा - पद्धति केवल किताबी ज्ञान पर  ही जयादा ज़ोर देती है, वह बच्चों को रट्टा लगाने, तथा किताबी कीड़ा बनने में ही सहायता देती है।  कई सौ सालों के पहले हुए ऐतिहासिक घटनाएँ , जियामेट्री, इत्यादि से केवल पुस्तकीय ज्ञान मिलता है किन्तु रोज़ - मर्रा के जीवन में वह कहाँ तक मदद करती है ? इसलिए खेल - कूद और अन्य नवीनतम पाठ्यक्रम, जो बच्चों में अनुशासन , सद्भावना, आपसी मेल - जोल को बढ़ावा दें ऐसी शिक्षा - पध्दति का होना आवाश्यक है, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दें। 

Q. बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है ?

A.  बड़े भाई यह समझते हैं कि  केवल आँकड़े कंठस्थ करने से जीवन की समझ नहीं आती बल्कि जीवन के अनुभवों से आती है।  किताबी ज्ञान की सफलता की पहचान उसे व्यावहारिक जीवन में उपयोग करने से हिमिलतिहै।  वे अपने दादाजी , माँ और प्रिंसिपल साहब की अनपढ़ माँ का उदाहरनदेते हुए कहते हैं कि  उन सब का ज्ञान पढ़े - लिखे लोगों से कहीं अधिक है। 

Q . बड़े भाई बार - बार फेल होने के बावजूद छोटे भाई को क्यों ठोकते हैं ?

A . बड़े भाई को छोटे भाई की चिंता है कि  कहीं वो घमंड में आकर पढ़ना - लिखना छोड़ दे, तो वह भी फेल हो जाएगा।  इसलिए उसकी भलाई के लिए वे उसे समय - समय पर डाँटते -फटकारते रहते हैं।  वह प्यार से यह समझाते हैं कि  केवल रट्टा मारने से कोई महान नहीं बन जाता वरन उसे किसी विषय का सम्पूर्ण व्यावहारिक ज्ञान भी होने चाहिए और किस्मत बार - बार साथ नहीं देती।

Q . बड़े भाई साहब का स्वभाव कैसा था ?

A . वे उपदेश देने में निपुण थे।  उनमे काफ़ी सयंम एवं आत्मनियंत्रण था।  उनका विशवास था कि  सफल होने के लिए मनुष्य को कुछ चीज़ों का त्याग करना पड़ता है।  वे बहुत अध्ययनशील थे।  वे बहुत परिश्रमी थे।  वे बड़ों का बहुत आदर करते थे। 

आशय स्पष्ट करो 

Q . इम्तिहान पास कर लेना कोई आसान चीज़ नहीं।  असली चीज़ है बुद्धि विकास।

A . बड़े भाई साहब की पढाई में अधिक रुचि होने के बावजूद वे बार - बार फेल हो जाते थे, वे इसका कारण शिक्षा - प्रणाली में पायी जाने वाली कमी को ठहराते थे।  उनका मानना था कि  केवल रट्टा मारने से कोई भी पास हो सकता है , किन्तु किसी विषय के बारे में पूरी जानकारी रखना जीवन में लाभदायक होता है।  वह अपने छोटे भाई को समझाते हुए कहते थे कि  उनके दादाजी, माँ तथा प्रिंसिपल साहब माँ, अनपढ़ होने के बावजूद दुनियादारी की थे।  उनकी धारणा में किताबें पढ़कर केवल किताबी ज्ञान लेकिन दुनियादारी सीखने के लिए अनुभव आवश्यक है।

Q . फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह माया के बंधन में जकड़ा रहता है , मैं फटकार और घुडकियां खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।

A . सभी को यह मालूम है कि कोई मौत से नहीं बच सकता , फिर भी हम कल के सपने और योजनाएं बना डालते हैं. मौत के आने पर सब कुछ ख़त्म हो जाता है , उसी तरह यह जानते हुए भी कि खेल - कूद में ज़्यादा देर रमे रहने  से बड़े भाई की डाँट -फटकार सुननी पड़ेगी , लेखक की रुचि हमेशा उसी में लगी रहती थी। 

Q . अगर बुनियाद ही पुख्ता न हो , तो मकान कैसे पायेदार बने ?

A . इमारत  जितनी ऊंची हो उसकी बुनियाद उतनी ही गहरी होनी चाहिए , वर्ना वह दृढ़ता से खड़ा नहीं रह सकता।  इसी तरह बड़े भाई साहब भी बार - बार फेल हो रहे थे जैसे अपनी शिक्षा की नींव काफ़ी गहरी दाल रहें हो।  यह कथन उनकी असफलता पर व्यंग्य है।

Q . आँखें आसमान की और थीं मन उस आकाशगामी पथिक की और, हो मंद गति से झूमता पतन की और चला आ रहा था, मनो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार गर्हण करने जा रही हो।

A . एक दिन शाम के समय लेखक को आसमान में एक कटी पतंग दिखाई दी, उसे देखकर उन्हें ऐसा लगा मानो कोई संसार से छूटी एक आत्मा, विरक्त, मुक्त भाव से अपने धुन में चली जा रही हो, किसी नए संसार की ओर।  फिर जैसे किसी नए जन्मे की तलाश में जैसे वापस आए उसी तरह वह सर्र से नीचे की ओर आने लगी।  इसे देखते ही लेखक झटपट उसे लेने उस दिशा में दौड़ने लगे।

पाठ समाप्त।

स्नेहपपूर्वक,

सीता माँ ! :)








Monday, 23 May 2016

Grammar Unit - 1

DETERMINERS

We've done this in the previous classes in the form of a, an, the, few, many, this, that, these, those, much, myyour, ours, his, hers, theirs, some, all, both, a little, each, eitherevery, etc. etc.

The main work of these is to determine what the noun or subject that's being about , that is already known, new, specific etc.

For example, let's start with: Scientists have discovered a new planet, 140,000 light years from us. The new planet has conditions akin to ours. There are many craters indicative of a possible meteor collision. There are very few plants. There isn't much to report further as we are yet to come across any pictures of other living organisms living there. There might be other planets like this in the universe just to be discovered.

In the above, sentence, a is to introduce a new concept. The is being used to elaborate more about it.
Many, few, much are all determiners. All the underlined words are determiners.

Now, for some exercises.

1.  The Sun has a core temperature of 15 million degrees Centigrade.

2.  There is a beautiful clock by River Thames. It is the Big Ben.

3. There were many tourists at Madame Tussaud's.

4.  There are a few who still believe in age old traditions and customs.

5.  There is very little time left for the schools to reopen.

Like this, we can try and incorporate the determiners while conversing with one another.

More to come!

Yours humbly,

Seetha Lakshmi. :-)

Wednesday, 30 March 2016

Kabeer

संत कबीर द्वारा रचित साखी

साखी का अर्थ है साक्षी

संत कबीर के जन्म की कोई स्पष्ट तिथि नहीं है।  ऐसा माना जाता है कि  वे १३९८ से १५१८ के काल में रहे।  उनके गुरु श्री रामानंद थे।  वे ईश्वर के निराकार रूप को मानते थे।  उनके लिए रीती - रिवाज़ों से अधिक मानव में भगवान दिखाई देते थे।  उनके लिए ईश्वर एक, निराकार थे. उनके लिए सब धर्म सामान थे।  उन्हें ढरम के नाम पर फसाद बिलकुल पसंद नहीं था।  उन्होंने मूर्ति - पूजा की आलोचना की। 

उन्होंने कई स्थानों का भ्रमण किया जिसका प्रभाव उनके दोहों में छिपे विवध बोलियों में झलकती हैं।  अवधी , राजस्थानी, पंजाबी, भोजपुरी एवं खड़ी बोली का उन्होंने अधिकतर उपयोग किया है।  इसलिए उनकी भाषा 'पचमेल खिचड़ी" के नाम से भी जानी जाती है। कबीर की भाषा को "सधुक्कड़ी" भी कहा जाता है।

There is no particular time frame of Kabir's birth available in history. It is believed that he lived between 1398 and 1518. He was a disciple of Guru Ramanand. He believed God to be formless, criticized idol worship and was against useless social and religious rites. For Him God was one and all religions led to the same path.

He wandered throughout the country, which is visible in "Dohas" (Couplets). The main languages that he used while constructing the dohas are Avadhi, Rajasthani, Punjabi and Bhojpuri. Hence, his language is also known as "Pachmel Khichdi". His language is also known was "Sadhukkadi".

ऐसी बाणी बोलिये , मन का आपा खोइ ।
अपना तन सीतल करै , औरन को सुख होइ । ।

मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है, जिसमे बोलने समझने की शक्ति है. तो यह हमारा कर्तव्य है कि  हम जब भी बोलें , मीठे वचन बोलें।  वचन ऐसा हो, जिसे सुनकर सब को ठंडक पहुँचे , दुःख न हो।  ऐसा न हो कि  हमारे बोले हुए कटु वचन बाद में हमें भी दुःख पहुँचाए। 

Aisi Baani Boliye, mann kaa aapaa khoi.
apna tan sital karai, auran ko sukh hoi.

Humans are the only ones blessed with an ability to talk, hence it is our duty to talk in a sweet, pleasant manner, which gives us as well as the listener immense joy / pleasure.

कस्तूरी कुंडली बसै , मृग ढूँढे बन माँहि।
ऐसे घटि -घटि राम हैं , दुनिया देखै नाहीं। ।

मृग / हिरन के नाभि में कस्तूरी का वास है , किन्तु वह इस बात से अज्ञात है। वह पूरे वन / जंगल में इस सुगंध की खोज जीवनभर करती है।  इसी प्रकार ईश्वर / भगवान / राम ब्रह्माण्ड के कण - कण में हैं, किन्तु हम उन्हें मूर्तियों, मंदिरों एवं रिति -रिवाजों में ढूढ़ते रहते हैं।  हमार पूरा जीवनकाल इसी में बीत जाता है। 

Kasturi kundali basai, mrug dhundai ban maanhi.
aise ghati - ghati Ram hain, duniya dekhai naahin .

The Kasturi Deer searches for the smell of kasturi throughout the forest, being ignorant of the fact that it is coming from within, likewise, GOD who is present in every atom of the Universe is being searched for in many things by us, ignorant of the fact that he dwells within.

जब मैं था तब हरि नहीं , अब हरि हैं मैं नाहिं।
सब अँधियारा मिटि गया , जब दीपक देख्या माँहि। ।

जब "मैं " यानि कि  अहंकार था, तब मनकमल में विराजमान हरि / भगवान (सद्गुण) देदीप्यमान न हो सका।  अब हरि  यानि कि  हर प्राणी / ब्रह्माण्ड में भगवान को देखने की आँखें मिली हैं, तब अहंकार / मैं न जाने कहाँ विलीन हो गया !

Jab mai tha tab Hari nahin, ab Hari hain mai naahi.
sab andhiyaaraa miti gaya, jab dipak dekhya maanhi.


When "I" (Ego) was ruling my heart, it couldn't feel GOD, now that it has realized GOD, this "I" / Ego has vanished.

सुखिया सब संसार है , खाये अरू सोवै।
दुखिया दास कबीर है , जागै अरू रोवै। ।

समस्त संसार अपने ही धुन में मस्त है , अपना मूलयवान समय धन - अर्जित करने, खाने-पीने और सोने में गवाँ देता है।  किन्तु , मैंने (कबीर ने) अब हरि  को पा लिया है, तो संसार के ये सारे काम उसे फीके लगते हैं, यहाँ मन नहीं रमता और अपने भगवान से पुनर्मिलन की आशा में उनका मन दिन - रात जागता है और रोता है। 

Sukhiya sab sansaar hai , khaye aru sovai.
dukhiya das Kabir hai, jaage aru rovai.

The World seems to happy in worldly things of money-making, eating, drinking and making merry, But , I , Kabir, have am crying to meet my creator again as after realizing HIM, have woken up to the fact that he's the only source of happiness to the SOUL.

बिरह भुवंगम तन बसै , मंत्र न लागै कोइ।
राम बियोगी न जिवै , जिवै तो बौरा होइ। ।

जब बिरह (प्रिय से दूर होने का कष्ट) का भुजंग (साँप ) काटता है, तो उसका किसी इलाज नहीं मिलता, वरन प्रिय से पुन : मिलन से ही संतोष मिलता है।  कबीर यह कह रहे हैं कि , राम के वियोग ( संग छूटना) से कोई जीवित नहीं रह सकता , और अगर हो भी , तो मन राम को ढूंढते - ढूंढते पगला जाता है।

Birah bhuvangam tan basai, mantr na laagai koi.
Ram biyogi na jivai, jivai to baura hoi.

When the pangs of separations (Snake of separation bites) set in, the world can't provide medicine / relief from it, except for the object of love. Likewise, now, that Kabir has realized Ram / GOD, he can't bear this separation and thinks anyone who is drunk in the love of the DIVINE, can't be alive after this and if at all, they are sure to go crazy!

निंदक नेडा राखिये , आंगणि कुटी बंधाई।
बिन साबण पानी बिना , निरमल करै सुभाइ। ।

कबीर कहते हैं, कि अपनी निंदा करने वालों को अपने साथ रखना चाहिए, हो सके तो अपने आँगन में उनके लिए कुटिया तक बनाएं , क्योंकि यह बिन साबुन - पानी के हमारे अंत:करण की शुद्धि कर देते हैं. अर्थ यह है कि  चापलूसी करने वालो से ज़्यादा निंदक हमारे गलतियों से हमें परिचित करवाते है, ताकि हम उन्हें सुधार सकें। 

Ninidak nedaa raakhiye, aangaNi kuti bandhaai .
bin saabaN paaNi bina, nirmal karai subhaai.

According to Saint Kabir, one should pay close attention to one's critics, if possible keep them closer, as they are important in shaping up our personalities by pointing out our mistakes. This helps in self-improvement.

पोथी पढ़ि -पढ़ि जग मुवा , पंडित भया न कोई।
एकै अशिर पीव का, पढ़ै सो पंडित होइ। ।


केवल किताबी - कीड़ा या किताबी ज्ञान प्राप्त कर लेने से कोई पढ़ा-लिखा पंडित नहीं कहलाया जा सकता।  वह तभी सच्चे मायनों में पंडित बनता है, जब वह संसार के उतार - चढ़ावों से परिचित होता है।  लोगों से मेल - मिलाप बढ़ाने में सफल होता है।  सबके साथ प्रेम से मिल-जुल कर रहना सिख लेता है। 

Pothi padhi - padhi jag muvaa, pandit bhaya na koi.
aikai aashir peev ke, padhai so pandit hoi .

No one becomes a learned person, by accumulating degrees. They have to step out in the school of world, gather some experience, fall and rise and learn how to live in harmony with oneself and others, that they transform into a learned person in the true sense.

हम घर जाल्या आपणां , लिया मुराडा हाथि।
अब घर जालों तास का, जे चलै हमारे साथि। ।

हमने अपना घर (सांसारिक इच्छाएँ ) जला डाला है, भगवान का नाम लेते ही यह सारी बेमतलब इच्छाओं का विनाश हो गया है, अब मेरे (कबीर) पास राम-नाम की जलती हुई लकड़ी है, आओ साथियों, जिन्हे अपने इच्छाओं से परे होना हो, अपना घर जलाना हो, मैं उनकी सहायता करूँगा।

Ham ghar jaalyaa aapnaa, liyaa muraadaa haathi.
ab ghar Jalon taas kaa, je chalai hamaare saathi .

I've burnt down this house (worldly desires) with this burning log of Ram-naam (Chanting of the Lord's name) and I'm free. Come O brothers / friends those who want to burn their house of desires are eligible for any help from me.

प्रश्नोत्तरी

Q .  मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है ?

A .  मनुष्य को चाहिए कि वह हमेशा मीठा बोले, इससे वातावरण में शान्ति, मधुरता एवं सहजता उत्पन्न होती है।  आपसी समबन्ध अच्छे बनते हैं, अगर कोई कड़वी बात भी कहनी तो, वाणी में मिठास होने के कारण वह बात ज़्यादा चुभती नहीं।  आपसी दुश्मनी ख़त्म हो जाती है। दवाई सदैव कड़वी होती है, इसलिए उसमे कुछ मिठास घोल दिया जाता है ताकि उसे पीने में कोई कष्ट न हो, यही काम मीठे वचन करता है। 

Q . दीपक दिखाई देने पर अंधियारा कैसे मीट जाता है ? साखी के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए।

A . मनुष्य जीवन में कई उतार - चढ़ाव आते हैं।  हमारे अंदर कई गुण हैं उसी तरह अवगुण हैं।  ये अवगुण कभी जन्मजात होते हैं तो कभी हमारे द्वारा जीवन - पथ में समेटे हुए , किन्तु अगर हम पर कभी ईश्वर की कृपा से ज्ञान रूपी प्रकाश के दर्शन मिलें तो ये सारे के सारे अवगुण मीट जाते हैं , ठीक उसी तरह जिस तरह अँधेरे को दूर करने के लिए हम दिया जलाते हैं। हमारे अंदर ज्ञान हो तो सारे भेदभाव मीट जाते हैं और हर प्राणी में ईश्वर का साक्षात्कार मिलता है।

Q . ईश्वर कण - कण में व्याप्त है , पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते ?

A . ईश्वर सारे ब्रह्मांड में व्याप्त हैं किन्तु हम उन्हें देखने में असमर्थ हैं, क्योंकि हम अप्पने दृष्टिकोण से लोगों एवं परिस्थितियों को मापते हैं, जबकि ईश्वर गुणों से परे हैं , अगर हम यह समझें कि हर कोई ईश्वर के अथाह प्रेम से बना है तो हम सबमे, हर कण में ईश्वर को अवश्य देख पाएँगे।  कबीर महापुरुष थे इसलिए उन्हें घट -घट में राम अर्थात, ईश्वर दिखाई दिए।

Q .  संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन? यहां 'सोना' और 'जागना' किसके पप्रतीक हैं ? इसका प्रयोग यहां क्यों किया गया है? स्पष्ट कीजिए।

A . 

Please be kind and patient with me as I'm still learning. If there are any mistakes, kindly help me in rectifying those, as this blog is for all of us and the higher perspective here is to learn! :)

अगर गलतियाँ हों तो क्षमा चाहती हूँ।  कृपया गलतियाँ सुधारने में मेरी सहायता करें।  इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य सीखना है और यह हैं सब के लिए लाभदायक होगा। 

Everyone's friend,
Seetha Lakshmi! :-)

सबकी मित्र ,

सीता लक्ष्मी :-)

Saturday, 26 March 2016

Welcome / Namste! :)

Hi! Iam Seetha Lakshmi. I want to share whatever little I've learned till now with you all. I am not an expert and plan to learn alongside everyone of you! So, I heartily welcome everyone who is going to travel with me in this journey of learning and teaching. I will try teaching English and Hindi through this blog.

नमस्ते ! मै सीता लक्ष्मी  हूँ . मुझे आजतक जो भी थोडा बहुत ज्ञान मिला है, उसे आप सभी के साथ बाँटना चाहती हूँ. आप सबको सिखाते हुए मुझे भी कई बातें सीखने को मिलेंगी, ऐसा उम्मीद करती हूँ। तो सीखने-सिखाने की इस यात्रा में आप सबका हार्दिक  स्वागत है। मैं इस ब्लॉग में हिंदी और अंग्रेजी सिखाने का प्रयास करुँगी।

Seetha Lakshmi R S :)