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Wednesday, 20 July 2016

Diary ka ek panna! :)

Q .  विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रया हुई?

A .  श्रद्धानन्द पार्क में बंगाल प्रांतीय, विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने जब झंडा गाड़ा तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।  उनके साथ आए अन्य लोगों को मार-पीट कर वहां से हटाया।

Q .  लोग अपने - अपने मकानों व् सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का सन्देश देना चाहते थे ?

A .  लोग अपने - अपने मकान एवं सार्वजनिक स्थल पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर इस बात का सन्देश देना चाहते थे कि वे अपने - आप को स्वतन्त्र देश का वासी समझते हैं , अपने राष्ट्रीय झंडे का सम्मान करते हैं तथा उन्हें किसी का डर नहीं।

Q .  पुलिस ने - बड़े बड़े पार्कों को क्यों घेर लिया ?

A .  उस वक़्त स्वतंत्रता आंदोलन बड़े ज़ोर -शोर से चल रहा था।  लोग सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे , उस प्रदर्शन का मुख्य अंश था - सार्वजनिक स्थलों में एकत्रित होकर स्वंत्रता भाषण देना , झंडा फहराना, इत्यादि , पुलिस कमिश्नर यह नहीं चाहते थे कि इस आंदोलन को बढ़ावा मिले, इसलिए उन्होंने बड़े - बड़े पार्कों को घेर लिया।

Q. कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था ?

A . यह दिनांक इसलिए महत्त्वपूर्ण था क्योंकि इसे सारे भारतवर्ष में स्वतंत्रता की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जा रहा था।  यह दिन अंग्रेजी सरकार के खिलाफ स्वतंत्रता मनाने एवं अपना विरोध प्रकट करने के लिए कलकत्तावासियों के लिए एक सुनहरा मौक़ा था। 

Q . सुभाष बाबू के जुलुस का भार किस पर था ?

A.  सुभाष बाबू  जुलुस का भार पूर्णोदास पर था. उन्होंने कई जगह पर फोटो का प्रबंध किया , किन्तु बाद में पुलिस उन्हें पकड़ लिया। 

Q २६ जनवरी १९३१ के दिन को अमर बनाने क्या - तैयारियाँ की गई ?

A . कलकत्तावासियों के लिए २६ जनवरी १९३१ एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन था।  इस अमर बनाने के लिए शहर के लोगों ने एकजुट होकर क़रीब रुपए खर्च किए , विभिन्न भागों एवं घर - घर में झंडे फ़हराए , कार्यकर्ताओं ने घर -घर जाकर लोगों को समझाया।  ऐसा उत्सव का माहौल तैयार किया गया जैसे देश को पूर्ण स्वतंत्रता मिल गई हो। 

Q . 'आज जो बात थी वह निराली थी' - किस बात से पता चल रहा था किआज का दिन अपने आप में निराला है ? स्पष्ट कीजिए।

A . यह घटना सविनय अवज्ञा आंदोलन का एक सबसे बड़ा प्रतीक था।  निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद लोगों ने एकजुट होकर अपने विरोध तथा देश की स्वतंत्रता के प्रति अपने जोश का प्रदर्शन दिया।  तीन बजे से भीड़ जमा होने लगी , वे सब सभा के शुरू होने के इंतज़ार में थे।  न केवल सार्वजनिक स्थल किन्तु घर  - घर भी तिरंगा लहरता दिखाई दिया।  विशेष बात यह थी कि स्त्रियों ने भी जमकर भाग लिया , गिरफ्तार हुए , लाठियाँ खाई किन्तु उनका उत्साह ज़रा भी काम नहीं हुआ।  इसलिए कहा गया है कि वह दिन ही कुछ निराली थी। 

Q .  पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था ?

A .  पुलिस कमिश्नर के नोटिस में भय दिखाया गया कि अमुक धारा के तहत अगर किसी ने सभा में भाग लिया तो उसे दोषी समझा जाएगा दूसरी तरफ कौंसिल की नोटिस सरकार को एक खुली चुनौती थी जिसमे यह कहा गया था कि मोन्यूमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी।  सभी की उपस्तिथि अनिवार्य है।  यह दोनों नोटिस एक दूसरे के विरोध में विचार प्रकट कर रहे थे।  एक भय फैला रहा था तो दुसरा लोगों के अंदर की देशभक्ति को उकसा रही थी। 

Q . डॉ।  दासगुप्ता जुलुस में घायल लोगों की देख - रेख कर रहे थे , उनके फ़ोटो भी उतरवा रहे थे।  उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह थी ? स्पष्ट कीजिए।

A . डॉ।  दासगुप्ता द्वारा घायल लोगों की फोटो उतरवाने का कारण यह हो सकता है कि वे यह प्रत्यक्ष प्रमाण देशवासियों को दिखा सके , ताकि लोग अंग्रेजी सरकार की बर्बर व्यवहार देखकर प्रेरित एवं स्वतंत्रता आंदोलन में खुलकर भाग लें एवं ब्रिटिश सरकार की गलत नीतियों का खुलकर विरोध करें।

समाप्त! :)


सीता माँ ! :)

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