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Wednesday, 6 July 2016

Sanchayan Lesson - 1

हरिहर काका

बोध प्रश्न (from the textbook )

Q  कथावाचक और हरिहर काका क्या सम्बन्ध है और इसके क्या कारण हैं ?

A  हरिहर काका और कथावाचक / लेखक के बीच बहुत गहरा सम्बन्ध था।  दोनों एक ही गाँव के निवासी थे।  उन दोनों के बीच परिवार जैसे सम्बन्ध थे।  लेखक का काका के प्रति प्यार - सम्मान के दू मुख्य कारण थे :

१  वे दोनों पडोसी थे इसलिए सुख - दुःख में हमेशा साथ रहा।

२  लेखक को बचपन से काका ने पिता जैसे दुलार किया , जो लेखक के बड़े होने पर मित्रता में बदल गई।

Q   हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी में क्यों लगने लगे ?

A  हरिहर काका की अपनी कोई संतान न थी।  उनके पास पंद्रह बीघा ज़मीन था।  उनके भाइयों ने पहले तो उनकी खूब सेवा की किन्तु कुछ समय बाद उनकी साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया।  यह देखकर ठाकुरबारी के महन्त, काका को बहला - फुसलाकर अपने साथ ले गया।   उसने भी कुछ समय बाद काका से ज़मीन की माँग की , पर जब काका ने मना कर दिया , तो उन्हें मार - पीटकर उनसे ज़बरन कागज़ों पर अँगूठा लगवा लिया।  यह सब देखकर काका को लगा कि उनके भाई एवं महंत दोनों एक ही श्रेणी के हैं।

Q .  ठाकुरबारी के प्रति गाँववालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं उससे उनकी किस मनोवृत्त्ति का पता चलता है ?

A ठाकुरबारी गाँव का एक पुराना धार्मिक स्थल है।  माना जाता है कि कहीं से एक संत आकर वहाँ रहने लगे।  वे प्रतिदिन ठाकुर जी की पूजा करते थे।  तब गाँव में बहुत आबादी नहीं थी, पर जब लोगों की संख्या धीरे - धीरे बढ़ने लगी तो उन्होंने चंदा जमा किया और उससे ठाकुर जी के लिए एक छोटा - सा मंदिर बनवाया।  धीरे - धीरे मंदिर का विकास होने लगा।  लोग यह मानने लगे कि  ठाकुर जी की कृपा से ही उनकी सारी मन्नतें पूरी होतीं हैं जैसे, बच्चे का जन्म, नौकरी लगना , मुकदमे में जीत आदि।  वे बड़ी श्रद्धा से मंदिर में रुपये , ज़ेवर , अनाज आदि चढ़ाने लगे।  यह सारी बातें उनकी मंदिर के प्रति अंधी श्रद्धा को दर्शाती है।

Q . अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुइंया की बेहतर समझ रखते हैं - कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

A . हरिहर काका यह अच्छी तरह जानते थे कि उनके सगे -सम्बन्धी एवं गाँव के लोग उनका आदर उनकी ज़मीन -जायदाद की वजह से ही करते हैं।  अपने भाइयों और महंत के लाख समझाने पर भी उन्होंने अपना ज़मीन किसी के नाम नहीं किया।  इसका यह कारण था कि कुछ लोगों के अपने जीते जी जब सगे -सम्बन्धियों के नाम अपना जायदाद किया तो उनकी दशा बहुत दयनीय हो गई थी।  वे नहीं चाहते थे कि उनकी भी वही हालत हो।  

Q. हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे ? उन्होंने उनके साथ कैसा बर्ताव किया ?

A . महंत के भेजे हुए आदमी हरिहर काका को जबरन उठा कर ले गए. उन्होंने काका के साथ बहुत दुर्व्यवहार किया, पहले ततो उन्होंने काका को डराया - धमकाया, पर जब काम नहीं हुआ तो उन्हें मारा, पीटा , हाथ - पाँव बांधा, उनके मुँह में कपड़ा ठूँसा , फिर दस्तावेज़ों पर ज़बरदस्ती काका के अँगूठे का निशाँ लगवाया।  फिर उन्हें उसी कमरे में ताला बंद किया और इसी दयनीय स्तिथि में छोड़कर नौ दो ग्यारह हो गए। 

Q . हरिहर काका के गांववालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे ?

A . हरिहर काका के मामले में गांववाले दो पक्ष के हो गए थे. आधे लोग यह कहने लगे कि काका की ज़मीन पर परिवारवालों का हक़ बनता है इसलिए ज़मीन उनके नाम कर देनी चाहिए और बाकी लोगों का यह कहना था कि ज़मीन ठाकुरबारी के नाम करने पर उन्हें भगवान से मोक्ष की प्राप्ति होगी।  यह सब इसलिए हुआ क्योंकि काका विधुर (Widower ) थे और उनकी कोई संतान नहीं थी।  इसलिए सबका मन लालच से भर गया।

Q . कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा, "अज्ञान की स्तिथि में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं।  ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरन करने के लिए तैयार हो जाते हैं.

A . इस संसार में जो भी आता है उसकी मृत्यु एक दिन निश्चित है।  इस सत्य को सब जानते हैं पर कोई यह नहीं चाहता है उसकी मृत्यु हो, किन्तु जब विषम परिस्तिथियों से जब हमें गुज़रना पड़ता है और दुनिया के सच्चे रंग से आमना - सामना होता है तो मन करता है कि  ऐसे तिल -तिल रोज़-रोज़ मरने से तो यही अच्छा होगा कि एक ही झटके में मौत आ जाए।  हरिहर काका भी पहले अपने सम्पत्ति के प्रति मोह - पाश में फँसे रहते हैं पर जब उनके अपने भाई और महंत उनसे ज़बरदस्ती करतें हैं, तो उन्हें ज्ञान होता है और उनका मृत्यु के प्रति सम्पूर्ण दृष्टिकोण बदल जाता है।

Q . समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है ? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

A . में नैतिक मूल्यों की कोई अहमियत नहीं रही और उसे अपनाने वालों को लोग ओछी नज़रों से देखते हैं।  सभी रिश्ते-नाते स्वार्थ के आधार पर ठीके हुए हैं।  अच्छे या बुरे वक़्त में अपने पराए की पहचान हो जाती है। 
आजकल रिश्तों में बन्धुत्व काम और स्वार्थ ज़्यादा है , जब तक अपने स्वार्थ की पूर्ति होती है , तब तक रिश्ते कायम हैं ,छोटी-से छोटी समस्या के आने मात्र पर रिश्तों में दरार पड़ जाते हैं कभी-कभी रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं।  आजकल मानवता पर ध्यान धन-दौलत के पीछे इंसान ज़्यादा भागता है।  वह यह समझता है कि पैसे से सब है और अंत समय आने पर रिश्तों के लिए तरसता है।

Q . हरिहर काका के धार्मिक विचारों के बारे में बताइए।

A . हरिहर काका बहुत ही धार्मिक विचारों वाले व्यक्ति थे।  खेती के बाद का अधिकतर समय वे मंदिर में बिताते थे।  वे भजन - कीर्तन किया करते।  वे बहुत ही संस्कारी व्यक्ति थे।  लेखक जो पडोसी का बेटा था उसे अपने पुत्र जैसा मानते थे।  उनके पत्नी के मृत्यु हो जाने के बाद लोगों ने उन्हें पुनर्विवाह के लिए उकसाया किन्तु उन्होंने अपनी बढ़ती उम्र और धार्मिक संस्कारों के कारण मना कर दिया।  वे बहुत ही सहनशील व्यक्ति थे। 

समाप्त ! :)

सीता माँ  :)

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